Krishna

Maiya Tharo Kanudo

मैया थारो कानूडो

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यहीं चलाएँ · Play here
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मैया थारो कानूडो, घणो ऐ बदमाश, माखन की फोड़े माटकी ॥ टेक ॥ गुजरी कानूडो, सुतो छ मेहला माय, मत देवे झूठो ओळबा, मैया थारो कानूडो, घणो ऐ बदमाश, माखन की फोड़े माटकी ॥1॥ मैया हमारी कान्हा का, बांधा छ दोनों हाथ, पैरा में घाली सांखलया, मैया थारो कानूडो, घणो ऐ बदमाश, माखन की फोड़े माटकी ॥2॥ जसोदा नंदलाला ने, दिनी रे आवाज, आंगण में बाजा घुघरा, मैया थारो कानूडो, घणो ऐ बदमाश, माखन की फोड़े माटकी ॥3॥ ऐ गुजरी आज बाद, मत लीजो झूठों नाम, मत आजो मारे बारने, मैया थारो कानूडो, घणो ऐ बदमाश, माखन की फोड़े माटकी ॥4॥ ए कान्हा थारा भजन, मंडली करें गुणगान, थे पार लगा दीजिए नावड़ी, मैया थारो कानूडो, घणो ऐ बदमाश, माखन की फोड़े माटकी ॥5॥

इस भजन के बारे में

यह प्यारा भजन भगवान श्री कृष्ण की बाल-लीलाओं और मैया यशोदा के साथ उनके नटखट संवाद पर आधारित है। इसमें गोपियाँ यशोदा मैया से शिकायत करती हैं कि कान्हा बहुत शरारती हैं और माखन की मटकियाँ फोड़ देते हैं। वहीं दूसरी ओर, यशोदा मैया अपने लाडले का बचाव करती हैं और कहती हैं कि कान्हा तो सो रहे हैं, आप लोग उन पर झूठे आरोप न लगाएँ। यह भजन वात्सल्य रस से सराबोर है, जो हमें कान्हा की उस मासूमियत की याद दिलाता है जिसने पूरे ब्रज को प्रेम में बांध रखा था।

इस भजन को विशेष रूप से जन्माष्टमी, नंदोत्सव या किसी भी सत्संग के दौरान गाया जाता है। इसे गाते समय मन में कृष्ण के प्रति प्रेम और भक्ति का भाव जागृत होता है। भक्त इसे गाकर कान्हा की उस शरारती छवि का आनंद लेते हैं और उनसे प्रार्थना करते हैं कि जिस तरह उन्होंने गोपियों के कष्ट दूर किए, वैसे ही वे भक्तों के जीवन की नैया को भी पार लगाएं। यह भजन मन को आनंदित करने वाला और प्रभु के साथ एक मधुर संबंध स्थापित करने का माध्यम है।

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