Kathe Ghadayo Gajro
कठे घड़ायो गजरो
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कठे घड़ायो गजरो, ओ कठे घड़ायो बाजू,
कठे घड़ायी रे ओ थारी मुंदड़ी ॥ टेक ॥
गोंकुल घड़ायो गजरो, ओ मथुरा घड़ायो बाजू,
आ हेरो बड़ाई ओ हरि थारी मुंदड़ी ॥1॥
कतरा लाख रो गजरो, ओ कतरा लाख रो बाजू,
कतरा लाख री रे हरि थारी मुंदड़ी ॥2॥
12 लाख रो गजरो, 13 लाख रो बाजू,
सवा करोड़ री रे रंग थारी मुंदड़ी ॥3॥
कठे पैर रे गजरो, ओ कठे पैर बाजू,
कठे पैर रे हरि थारी मुंदड़ी ॥4॥
हाथ में पैर गजरो, ओ बगो में पैर बाजू,
सतड़ी रमाऊ रे हरि थारी मुंदड़ी ॥5॥
किकण बाजे गजरो, ओ किकण बाजे बाजू,
किकण बाजे रे हरि थारी मुंदड़ी ॥6॥
रमझम बाजे गजरो, ओ छम छम बाजे बाजू,
पियु पियु बोले रे हरि थारी मुंदड़ी ॥7॥
कणीने लादो गजरो, ओ कणीने लादो बाजू,
कणीने लादी रे रंग थारी मुंदड़ी ॥8॥
राधाजी ने लादी गजरो, रुक्मणजी ने लादी बाजू,
मीरा बाई लादी रे हरि थारी मुंदड़ी ॥9॥
अमर बेजो गजरो, अमर बेजो बाजू,
बारह फैलानी रे हरि थारी मुंदड़ी ॥10॥
कठे घड़ायो गजरो, ओ कठे घड़ायो बाजू,
कठे घड़ायी रे ओ थारी मुंदड़ी ॥11॥
✍️ रचयिता: मीरा बाई
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