Juna Yogi Aaya
जुना योगी आया
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जाग जाग नगरी का राजा, सुता शेर जगाया,
नगर में जुना योगी आया ॥ टेक ॥
पवन स्वरूपी रूप नहीं रेता, मन का डेरु चलाया,
तन मन का एक तार लगाया, ब्रह्मवेद ओलखाया,
नगर में जुना योगी आया ॥1॥
नाभ कमल में क्रांति का वासा, वापे ज्ञान लगाया,
उणी आसन मारा सतगुरु बैठा, पल पल दर्शन पाया,
नगर में जुना योगी आया ॥2॥
झरणा री झोली ममता री माला, फेरी फरता आया,
अरे फेरी गाले बाबो कछु न लेवे, नरभें रा नाम कमाया,
नगर में जुना योगी आया ॥3॥
पांच तत्व रे पच्चीस प्रकृतिया, अंके नाल समझाया,
सगुण से तो निर्गुण न्यारा, ऐं बेपी बाप ने ध्याया,
नगर में जुना योगी आया ॥4॥
जाग्योड़ा जीव जुगाजुग जागा, हे सुतोड़ा पछताया,
मच्छिन्द्र प्रताप जति गोरख जी बोले, हे सुरता वो शेर जगाया,
नगर में जुना योगी आया ॥5॥
जाग जाग नगरी का राजा, सुता शेर जगाया,
नगर में जुना योगी आया ॥6॥
✍️ रचयिता: गोरखनाथ
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