Nirgun / Satsang

Heli Mhari Kar Solah Singar

हेली म्हारी कर सोलह सिणगार

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हेली म्हारी कर सोलह सिणगार, गुरु जी सूं मिलबा चालां ये ॥ टेक ॥ गुरु शब्द को साबुन ले ले, कचरा ने परो निवार, राम नाम की टिकी लगा ले, सत्संग सुरमो सार। हेली म्हारी कर सोलह सिणगार, गुरु जी सूं मिलबा चालां ये ॥1॥ दया धर्म को पहर ले गागरो, नेम को नाड़ो सार, करड़ी गांठ जुगत से दीज्ये, हंसे नही संसार। हेली म्हारी कर सोलह सिणगार, गुरु जी सूं मिलबा चालां ये ॥2॥ ओर पिया म्हारै दाय नही आवे, अजर अमर पियो म्हारो, उण पिया से लगी डोर म्हारी, एक पलक नही न्यारो। हेली म्हारी कर सोलह सिणगार, गुरु जी सूं मिलबा चालां ये ॥3॥ नाथ गुलाब मिलिया गुरु पूरा, दियो शब्द तत सारो, भवानी नाथ गुरु जी के शरणे, सहजा लियो किनारो। हेली म्हारी कर सोलह सिणगार, गुरु जी सूं मिलबा चालां ये ॥4॥

✍️ रचयिता: नाथ गुलाब

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