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Hari Apane Angan Kachu Gavat

हरि अपनैं आंगन कछु गावत

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Hari Apane Angan Kachu Gavat
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हरि अपनैं आंगन कछु गावत। तनक तनक चरनन सों नाच मन हीं मनहिं रिझावत। बांह उठाइ कारी धौरी गैयनि टेरि बुलावत। कबहुंक बाबा नंद पुकारत कबहुंक घर में आवत। माखन तनक आपनैं कर लै तनक बदन में नावत। कबहुं चितै प्रतिबिंब खंभ मैं लोनी लिए खवावत। दुरि देखति जसुमति यह लीला हरष आनंद बढ़ावत। सूर स्याम के बाल चरित नित नितही देखत भावत॥

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