Krishna

Gujariya Ghani Nachai

गुजरिया घणी नचाई

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और कान्हा गोकुल का गेला म गुजरिया घणी नचाई र ओ नन्दजी का लाला ॥ टेक ॥ म्हासे करतो माथाफोड़ी थारे आगे आगे दौड़ी पगलिया म पड़ गया छाला र, ओ नन्दजी का लाला ॥1॥ मीठी बंशी घणी बजावे तू रूसी न फेर मनावे पाच्छे फिर फिर दे रियो झाला र, ओ नन्दजी का लाला ॥2॥ कान्हो रह नही छानो मानो अब म कुनको करूँ बहानो म्हाने भेजी पाला पाला र, ओ नन्दजी का लाला ॥3॥ म्हांरी न मानी लाचारी तने कहती कहती हारी म्हासे घणा करया तू चाहला र, ओ नन्दजी का लाला ॥4॥ क्यों हैरान कर छ म्हाने तड़क ख्युली थारी मां न क्यों तू मूंड पचारयो ठाला र, ओ नन्दजी का लाला ॥5॥ या राधा कृष्ण कि जोड़ी महिमा गाऊ जितनी थोड़ी फेर भगवान सहाय नित माला र, ओ नन्दजी का लाला ॥6॥

✍️ रचयिता: नरेन्द्र मंशा रामपुरा

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