Nirgun / Satsang

Ghat Mein Base Re Bhagwan

घट में बसे रे भगवान

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घट में बसे रे भगवान, मंदिर में काँई ढूंढती, फिरे म्हारी सुरता ॥ टेक ॥ मुरती कोर मंदिर में मेली, बा मुख से नहीं बोलै। दरवाजे दरबान खड्या है, बिना हुकम नहीं खोलै ॥1॥ गगन मंडल से गंगा उतरी, पाँचू कपड़ा धोले। बिन साबण तेरा मैल कटेगा, हरिभज निर्मल होले ॥2॥ सौदागर से सौदा करले, जचता मोल करालै। जे तेरे मन में फर्क आवे तो, घाल तराजू में तोले ॥3॥ नाथ गुलाब मिल्या गुरु पूरा, दिल का परदा खोले। भानीनाथ शरण सतगुरु की, राई कै पर्वत ओले ॥4॥

✍️ रचयिता: भानीनाथ

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