Krishna

Ghanshyam Teri Bansi Pagal Kar Jaati Hai

घनश्याम तेरी बंसी पागल कर जाती है

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घनश्याम तेरी बंसी पागल कर जाती है, मुस्कान तेरी मोहन घायल कर जाती है ॥ टेक ॥ सोने की होती तो क्या करते तुम मोहन, ये बांस की होकर भी दुनियां को नचाती है, घनश्याम तेरी बंसी पागल कर जाती है, मुस्कान तेरी मोहन घायल कर जाती है ॥1॥ तुम गोरे होते जो क्या कर जाते मोहन, जब काले रंग पे ही दुनियाँ मर जाती है, घनश्याम तेरी बंसी पागल कर जाती है, मुस्कान तेरी मोहन घायल कर जाती है ॥2॥ दुख दर्दों को सहना बंसी ने सिखाया है, और छेद हैं सीने में फिर भी मुस्काती है, घनश्याम तेरी बंसी पागल कर जाती है, मुस्कान तेरी मोहन घायल कर जाती है ॥3॥ कभी रास रचाते हो कभी बंसी बजाते हो, कभी माखन खाने की मन में आ जाती है, घनश्याम तेरी बंसी पागल कर जाती है, मुस्कान तेरी मोहन घायल कर जाती है ॥4॥

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