Dropadi Vinay
द्रोपदी विनय
Loading…
✍️ रचयिता: मनोज
इस भजन के बारे में
यह भजन महाभारत के उस मार्मिक प्रसंग का वर्णन करता है जब भरी सभा में द्रौपदी का चीर हरण हो रहा था और उन्होंने अपनी लाज बचाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण को पुकारा था। इस भजन में द्रौपदी की करुण पुकार और भगवान कृष्ण के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा का भावार्थ है। द्रौपदी, जो पांच पतियों की पत्नी थीं, फिर भी असहाय महसूस कर रही थीं, क्योंकि उनके पति भी वचनबद्ध होकर कुछ नहीं कर पा रहे थे। वह अपने भाई श्रीकृष्ण को राखी के बंधन की दुहाई देकर बुलाती हैं, उनसे अपनी लाज बचाने और दुष्टों का संहार करने की विनती करती हैं।
यह भजन विशेष रूप से भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है, जो भक्तों के संकटमोचक और शरणागत वत्सल हैं। यह द्रौपदी और कृष्ण के पवित्र भाई-बहन के रिश्ते को भी दर्शाता है, जहाँ एक बहन अपने भाई से अपनी रक्षा की गुहार लगाती है। यह भजन हमें सिखाता है कि जब सभी सहारे छूट जाते हैं, तब केवल ईश्वर ही अंतिम आश्रय होते हैं।
भक्त इस भजन को विशेष रूप से संकट के समय, निराशा की घड़ी में या जब उन्हें किसी दैवीय सहायता की आवश्यकता महसूस होती है, तब गाते हैं। इसे गाने से मन को शांति मिलती है, भगवान पर विश्वास गहरा होता है और यह भावना प्रबल होती है कि ईश्वर हमेशा अपने भक्तों की रक्षा के लिए तत्पर रहते हैं। यह भजन भक्तों को यह विश्वास दिलाता है कि उनकी पुकार कभी अनसुनी नहीं जाती और भगवान अवश्य उनकी सहायता के लिए आते हैं।
क्या ठीक नहीं है? चुनें — admin जल्दी सुधार देगा।