Krishna

Chhoti Chhoti Gaiya Chhote Chhote Gwal

छोटी-छोटी गईयाँ

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छोटी-छोटी गईयाँ, छोटे-छोटे ग्वाल। छोटो सो मेरो, मदन गोपाल ॥ टेक ॥ आगे-आगे गईया, पीछे-पीछे ग्वाल। बीच में चाले मेरो मदन गोपाल ॥1॥ कारी-कारी गईया, गोरे-गोरे ग्वाल। श्याम वरण मेरो मदन गोपाल ॥2॥ घास खावे गईया, दूध पीवे ग्वाल। माखन खावे मेरो मदन गोपाल ॥3॥ छोटी-छोटी लकुटी, छोटे-छोटे हाथ। बंशी बजावे मेरो मदन गोपाल ॥4॥ छोटी-छोटी सखियाँ, मधुवन बाग। रास रचावे मेरो मदन गोपाल ॥5॥

इस भजन के बारे में

यह प्यारा भजन भगवान श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं का सुंदर चित्रण करता है। इसमें वृंदावन के उस दृश्य का वर्णन है जहाँ नन्हे कन्हैया अपनी छोटी-छोटी गायों और सखाओं के साथ वन में विहार करते हैं। इस भजन का भाव यह है कि भगवान का स्वरूप अत्यंत सरल और मनमोहक है। जैसे ग्वाल-बाल उनके साथ प्रेम से रहते हैं, वैसे ही भक्त भी अपने मन में उस नटखट गोपाल की छवि बसाकर आनंदित होता है। यह भजन हमें याद दिलाता है कि ईश्वर हमारे बीच रहकर ही हमारे जीवन को प्रेम और माधुर्य से भर देते हैं।

यह भजन विशेष रूप से श्रीकृष्ण के बाल-रूप को समर्पित है। भक्त इसे अक्सर जन्माष्टमी, संकीर्तन या घर के मांगलिक कार्यक्रमों में गाते हैं। इसे गाने से मन में वात्सल्य भाव जागृत होता है और हृदय में शांति का अनुभव होता है। जब हम इस भजन को गाते हैं, तो ऐसा प्रतीत होता है मानो हम स्वयं वृंदावन की गलियों में कन्हैया के साथ खेल रहे हों। यह भजन मन के तनाव को दूर कर भक्ति के आनंद में डूबने का एक सरल और प्रभावी माध्यम है।

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