Krishna

Bhumi Par Badhta Asuron Ka

भूमि पर बढ़ता असुरों का

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Bhumi Par Badhta Asuron Ka
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भूमि पर बढ़ता असुरों का जब भार दिखाई दे सुदर्शन चक्रधारी का अवतार दिखाई दे ॥ टेक ॥ सतयुग में हिरण्यकश्यप था मुल्तान शहर राजधानी वह राम नाम का बैरी था अत्याचारी शैतानी प्रहलाद पुत्र उस राजा का था भक्त बड़ा सुर ज्ञानी हर घड़ी प्रभु का ध्यान धरे नहीं बात पिता की मानी तब हिरणाकुश के सीने में अहंकार दिखाई दे ॥1॥ कसकर खंबे से बांध दिया यूं बोला नीच लुंगाड़ा तेरा राम बतादे आज मनै तनै सारा शहर बिगाड़ा भक्तों का भगवान तुरत बन नरसिंह रूप दहाड़ा तिक्षण नख पैनी धारों से पापी का सीना फाड़ा तब छूट पड़ी पिचकार खून की धार दिखाई दे ॥2॥ त्रैता में राजा रावण ने भारी उत्पात मचाया डिगमगा उठी माता धरती यूं भारी पाप कमाया धर अवधपुरी अवतार हरि वन चाल पड़े रघुराया अग्निमय भीषण बाणों से सारा खलवंश खपाया लंका में वानर भालू की किलकार सुणाई दे ॥3॥ द्वापर का अत्याचारी था खल कंस मथुरा वाला वसुदेव देवकी कैद किये जड़ बेड़ी ऊपर ताला गौकुल में गौरस पीता कृष्ण देख रहा था चाला खल अंस कंस की छाती में दे मारा भीषण भाला भंवर भजो नारायण सेवा सार दिखाई दे ॥4॥

✍️ रचयिता: भंवर

इस भजन के बारे में

यह भजन भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों की महिमा और उनके द्वारा अधर्म के विनाश का वर्णन करता है। इसका भावार्थ यह है कि जब-जब पृथ्वी पर पाप और असुरों का भार बढ़ता है, तब-तब भगवान सुदर्शन चक्रधारी स्वयं अवतार लेकर भक्तों की रक्षा करते हैं। इसमें भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए नरसिंह अवतार, रावण के वध के लिए प्रभु श्री राम का अवतार और कंस के विनाश के लिए श्री कृष्ण के अवतार का सुंदर चित्रण किया गया है। यह भजन हमें याद दिलाता है कि ईश्वर सदैव अपने भक्तों के साथ हैं और दुष्टों का अंत निश्चित है।

यह भजन मुख्य रूप से भगवान विष्णु के अवतारों को समर्पित है और उनकी शक्ति व करुणा का स्मरण कराता है। भक्त इसे विशेष रूप से सत्संग, कीर्तन या किसी भी शुभ अवसर पर गाते हैं। इसे गाने से मन में साहस और भक्ति का संचार होता है। इस भजन को सुनने या गाने का उद्देश्य अपने भीतर के अहंकार को मिटाकर प्रभु के चरणों में पूर्ण समर्पण करना है। यह हमें सिखाता है कि कठिन समय में भी ईश्वर पर अटूट विश्वास रखना चाहिए, क्योंकि वे ही संसार के रक्षक और पालनहार हैं।

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