Bheru Ji

Bheruji Ro Bhajan (Marwari)

भेरुजी रो भजन (मारवाड़ी)

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म्हारा भेरुजी री जय जयकार, बोलो भेरुजी री जय जयकार॥ काळा भैरव गोरा भैरव, थारो न्यारो ठाठ। भगतां री रक्षा करो, राखो म्हारी लाज॥ थारे मंदिरिये में ज्योत जगे, बाजे घंटा नाद। धूप-दीप अरु आरती, सेवक करे फरियाद॥ संकट में जद याद करां, आवो थे तत्काल। भेरुजी म्हारा साचा धणी, राखो सब री लाज॥ थारी कृपा सूं घर में सुख, मिटे सगळा रोग। भगतां रो बेड़ो पार करो, म्हारा भेरु भगवान॥ म्हारा भेरुजी री जय जयकार, बोलो भेरुजी री जय जयकार॥

इस भजन के बारे में

यह भजन भगवान भैरवनाथ को समर्पित है, जिन्हें मारवाड़ और राजस्थान की लोक-संस्कृति में भक्तों का रक्षक और संकटमोचक माना जाता है। इस भजन का भावार्थ यह है कि भक्त अपने आराध्य भैरवजी की महिमा का गुणगान करते हुए उनसे प्रार्थना कर रहे हैं कि वे सदैव उनकी लाज रखें और जीवन के हर कठिन समय में उनकी रक्षा करें। इसमें काले और गोरे भैरव के स्वरूपों का वर्णन करते हुए भक्त उनके मंदिर में जलने वाली ज्योत, बजते घंटों और धूप-दीप की सुगंध के माध्यम से अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं।

भक्तों का विश्वास है कि भैरवजी साक्षात जागृत देव हैं, जो पुकारते ही अपने भक्तों के संकट दूर करने के लिए दौड़े चले आते हैं। इस भजन को विशेष रूप से मंगलवार और रविवार के दिन या भैरव अष्टमी के अवसर पर गाया जाता है। इसे गाने से मन को असीम शांति मिलती है और घर से नकारात्मकता दूर होती है। यह भजन भक्तों में यह भरोसा जगाता है कि यदि वे सच्चे मन से भैरवजी की शरण में जाएं, तो उनके सभी रोग और कष्ट मिट जाते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।

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