Bhairuji Nana Nana Re Baje Gungra
भैरूजी नाना-नाना रे बाजे गूंगरा
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इस भजन के बारे में
यह भजन लोक देवता भैरूजी की महिमा को समर्पित है। इसमें भैरूजी के चंचल और बाल रूप का वर्णन है, जहाँ उनके पैरों में बंधे घुंघरुओं की मधुर ध्वनि और झालर की झंकार के साथ वे डूंगरों (पहाड़ों) पर क्रीड़ा करते हैं। भजन का भावार्थ यह है कि भैरूजी अपने भक्तों के बीच रहकर उन्हें सात्विक जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं। वे मद्यपान जैसी कुरीतियों को त्यागकर दूध जैसे पवित्र मार्ग को अपनाने का संदेश देते हैं। साथ ही, यह भजन भैरूजी की उन लीलाओं को दर्शाता है जहाँ वे भक्तों के दैनिक जीवन में छोटी-मोटी शरारतें करते हैं, जैसे कुम्हारिन या गुजरकी के बर्तनों या सामान को नुकसान पहुँचाना, जो उनकी निराली कृपा और भक्तों के साथ उनके आत्मीय संबंध को दर्शाता है। भक्त इस भजन को विशेष रूप से भैरूजी के मेलों, जागरणों और उत्सवों के दौरान गाते हैं। इसे गाने से मन में उत्साह और भक्ति का संचार होता है। यह भजन भैरूजी के प्रति प्रेम और उनके प्रति समर्पण भाव को जगाने के लिए गाया जाता है, जिससे भक्तों को संकटों से मुक्ति और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
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