Krishna

Ae Kanho Baitho Re Mandfiyan Me

ऐ कान्हों बैठो रे मण्डफियां में

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ऐ कान्हों बैठो रे मण्डफियां में, बनके सेठ साँवरियो ॥ टेक ॥ ऐ ठाठलो देख्यो रे ठाकुर का, खम्बो छोड़ो रावलियों, ऐ कान्हों बैठो रे मण्डफियां में, बनके सेठ साँवरियो ॥1॥ ऐ आवे घणा दूरा-दूरा सूँ, माने मालवो सारों, ऐ प्रगटियों पृथ्वी पे पुजायो, मण्डफियां में भाँळा वालो, ऐ कान्हों बैठो रे मण्डफियां में, बनके सेठ साँवरियो ॥2॥ ऐ धज बन्ध धजा उड़े, धणियां की अब तो बैठो रे अकेलो, ऐ समझट जानिमा को लागे ग्यारसु, अमावसया को मेलो, ऐ कान्हों बैठो रे मण्डफियां में, बनके सेठ साँवरियो ॥3॥ ऐ खुले सपिड़ ने भण्डारा हे, रासू भाई रुपमा की लागे, ऐ निकले अणगणती का नोट, नाथ को परसों है सागे, ऐ कान्हों बैठो रे मण्डफियां में, बनके सेठ साँवरियो ॥4॥ ऐ लागे थाळी को झरनारो, बादल मन्दरिये गाजे, ऐ नाचे सभा में भैरियों, घेरा घुघयां बाजे, ऐ कान्हों बैठो रे मण्डफियां में, बनके सेठ साँवरियो ॥5॥

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