
सालासर बालाजी, चूरू — किसान को मूर्ति मिलना
Salasar Balaji, Churu — Kisan Ko Murti Milna
राजस्थान के चूरू जिले में बसा सालासर धाम आज करोड़ों भक्तों की आस्था का केंद्र है। यहाँ विराजते हैं दाढ़ी-मूँछ वाले अनोखे स्वरूप वाले श्री बालाजी हनुमान, जिनका मुखमंडल किसी और मंदिर की मूर्ति जैसा नहीं। इस धाम की कथा किसी राजा या ऋषि से नहीं, बल्कि एक साधारण किसान से जुड़ी है — और यही इस स्थान की सबसे बड़ी महिमा है कि प्रभु ने सेवा और श्रद्धा को ही अपना निवास चुना।
कहा जाता है कि लगभग तीन सौ वर्ष पूर्व नागौर जिले के आसोटा गाँव में एक किसान अपने खेत में हल चला रहा था। अचानक हल का फाल किसी कठोर वस्तु से टकराया। किसान ने मिट्टी हटाकर देखा तो वहाँ एक अद्भुत पाषाण-मूर्ति दबी हुई थी, जिस पर दाढ़ी-मूँछ सहित तेजस्वी मुखमंडल अंकित था। किसान की पत्नी ने उस मूर्ति को साफ़ करने के लिए अपने पल्लू से मिट्टी पोंछी, और जैसे ही स्पर्श हुआ, चारों ओर दिव्य आभा फैल गई। दोनों समझ गए कि यह कोई साधारण पत्थर नहीं, स्वयं बजरंगबली का साक्षात स्वरूप है।
उस समय सालासर गाँव में मोहनदास जी नामक परम हनुमान-भक्त संत रहते थे। उसी रात उन्हें स्वप्न में हनुमान जी ने दर्शन देकर आसोटा में प्रकट हुई मूर्ति के विषय में बताया और आज्ञा दी कि उसे सालासर लाकर स्थापित किया जाए। भक्त की श्रद्धा और प्रभु की इच्छा से वह दिव्य मूर्ति बैलगाड़ी में विराजमान होकर सालासर की ओर चली। कहते हैं, बैल स्वयं उसी स्थान पर आकर रुक गए जहाँ आज मंदिर है — मानो प्रभु ने अपना निवास स्वयं चुन लिया हो।
संत मोहनदास जी ने वहीं भव्य स्थान बनाकर बालाजी की स्थापना की और आजीवन उनकी सेवा में लीन रहे। उनकी तपस्या और भक्ति इतनी गहरी थी कि लोग आज भी उन्हें बालाजी के अनन्य सेवक के रूप में स्मरण करते हैं। मंदिर परिसर में मोहनदास जी की समाधि भी है, जहाँ भक्त पहले उन्हें नमन कर फिर बालाजी के दर्शन करते हैं।
सालासर बालाजी की एक विशेष परंपरा है — यहाँ भक्त अपनी मनोकामना पूरी होने पर सवामणी का भोग अर्पित करते हैं और मंदिर परिसर में नारियल बाँधकर मन्नत माँगते हैं। मनोकामना पूरी होने पर वही नारियल खोलकर बालाजी का आभार व्यक्त किया जाता है। चैत्र और आश्विन की पूर्णिमा पर यहाँ विशाल मेला लगता है, जिसमें दूर-दूर से पैदल यात्री ध्वजा लेकर आते हैं।
आज सालासर धाम राजस्थान ही नहीं, समूचे भारत के भक्तों के लिए संकटहरण का स्थान बन चुका है। लाखों श्रद्धालु मानते हैं कि यहाँ सच्चे मन से माँगी गई हर प्रार्थना बालाजी अवश्य सुनते हैं। एक किसान के खेत में प्रकट हुई वह मूर्ति आज असंख्य जीवनों में आशा और विश्वास का दीप जलाती है। सालासर की महिमा यही सिखाती है कि प्रभु धन-वैभव नहीं, केवल निश्छल भक्ति और सच्चा हृदय देखते हैं — और वहीं वे स्वयं प्रकट हो जाते हैं।