
मेहंदीपुर बालाजी, दौसा — प्रेत बाधा से मुक्ति
Mehandipur Balaji, Dausa — Pret Badha Se Mukti
राजस्थान के दौसा जिले में अरावली की पहाड़ियों के बीच बसा मेहंदीपुर बालाजी धाम एक ऐसा तीर्थ है जहाँ बजरंगबली को संकटमोचन और बाधा-निवारक के रूप में पूजा जाता है। यह स्थान विशेष रूप से उन दुखियारों की शरणस्थली माना जाता है जो अदृश्य बाधाओं, ऊपरी हवाओं और मानसिक क्लेशों से पीड़ित रहते हैं। यहाँ पहुँचकर असंख्य लोग अपने कष्टों से मुक्ति पाकर लौटते हैं, और यही इस धाम की अनूठी महिमा है।
कहा जाता है कि यहाँ बालाजी की मूर्ति स्वयंभू है — अर्थात किसी शिल्पी ने इसे नहीं गढ़ा, बल्कि यह पहाड़ की चट्टान से स्वयं प्रकट हुई। सदियों पहले यह क्षेत्र घने जंगल और दुर्गम पर्वतों से घिरा था। एक संत को स्वप्न में बालाजी ने दर्शन देकर बताया कि इस पर्वत में उनका दिव्य स्वरूप विद्यमान है। खोज करने पर वहाँ चट्टान में उभरी हुई हनुमान जी की आकृति मिली, जिसके चरणों से निरंतर एक जलधारा बहती रहती थी। भक्तजन उसी को दिव्य प्रसाद-जल मानते हैं।
इस धाम में तीन प्रमुख देव-शक्तियाँ पूजी जाती हैं — श्री बालाजी महाराज, श्री प्रेतराज सरकार और श्री भैरव बाबा (कोतवाल कप्तान)। परंपरा है कि बालाजी अपने भक्तों की रक्षा करते हैं, प्रेतराज सरकार बाधाओं का न्याय करते हैं और भैरव बाबा दंड देकर पीड़ित को मुक्त कराते हैं। यहाँ आने वाले साधक अर्जी लगाते हैं, जिसमें दरखास्त के रूप में प्रार्थना अर्पित की जाती है।
मेहंदीपुर की सबसे विशेष परंपरा है यहाँ का प्रसाद-व्यवहार। यहाँ का प्रसाद मंदिर परिसर के भीतर ही ग्रहण किया जाता है, उसे घर नहीं ले जाया जाता, और लौटते समय पीछे मुड़कर नहीं देखने की मान्यता है। ऐसा माना जाता है कि इन नियमों का पालन बाधाओं को साथ लौटने से रोकता है। भक्त पूर्ण श्रद्धा से इन परंपराओं का पालन करते हैं।
अनेक कथाएँ प्रचलित हैं कि जो व्यक्ति वर्षों से अकारण रोग, भय या मानसिक अशांति से जूझ रहे थे, वे यहाँ आकर बालाजी के दरबार में शांति पा गए। यहाँ चिकित्सक और वैद्य भी हार मान चुके रोगियों को श्रद्धालु बालाजी के चरणों में ले आते हैं, और सच्चे मन से की गई प्रार्थना से उन्हें राहत मिलती है। यही विश्वास इस धाम को जन-जन का सहारा बनाता है।
मंगलवार और शनिवार को यहाँ विशेष भीड़ उमड़ती है, जब बालाजी की आरती और सेवा में हजारों कंठ एक साथ जयकारे लगाते हैं। पूरे परिसर में हनुमान चालीसा और सुंदरकांड की गूँज वातावरण को भक्तिमय बना देती है।
मेहंदीपुर बालाजी की महिमा यही संदेश देती है कि जीवन में जब कोई मार्ग शेष न दिखे, जब भय और अंधकार घेर लें, तब संकटमोचन बजरंगबली का नाम ही सबसे बड़ा सहारा है। सच्ची श्रद्धा और निष्ठा से जो भी उनकी शरण में आता है, बालाजी उसकी हर बाधा हर लेते हैं और उसके जीवन में पुनः प्रकाश भर देते हैं।