Bet Dwarka Ka Hanuman-Makardhwaj Mandir

बेट द्वारका का हनुमान-मकरध्वज मंदिर

Bet Dwarka Ka Hanuman-Makardhwaj Mandir

गुजरात के पश्चिमी तट पर, अरब सागर के बीच बसे पावन द्वीप बेट द्वारका के समीप स्थित है एक अत्यंत अनूठा तीर्थ — हनुमान डांडी अर्थात हनुमान-मकरध्वज मंदिर। यह विश्व का संभवतः एकमात्र ऐसा मंदिर है जहाँ हनुमान जी अपने पुत्र मकरध्वज के साथ एक ही स्थान पर, आमने-सामने विराजमान हैं। पिता और पुत्र का यह दुर्लभ संगम इस धाम को समूचे भारत में विशिष्ट और अद्भुत बनाता है।

इस मंदिर से जुड़ी कथा रामायण के पाताल-लंका प्रसंग से आती है। कहा जाता है कि जब हनुमान जी लंका दहन के बाद समुद्र में कूदे, तब उनके पसीने की एक बूँद जल में गिर गई, जिसे एक विशाल मत्स्य ने निगल लिया। उसी बूँद से एक तेजस्वी वानर-पुत्र का जन्म हुआ, जिसका मुख मगर-मछली जैसा था — इसीलिए उसका नाम मकरध्वज पड़ा। बालक अपार बलशाली था और पाताल-लंका के राजा अहिरावण का द्वारपाल बन गया।

कथा आगे बढ़ती है कि जब अहिरावण छल से भगवान श्रीराम और लक्ष्मण जी को पाताल-लंका ले गया, तब हनुमान जी उन्हें छुड़ाने वहाँ पहुँचे। पाताल-लंका के द्वार पर उनका सामना मकरध्वज से हुआ। दोनों के बीच घोर युद्ध हुआ, और अंततः हनुमान जी ने मकरध्वज को परास्त कर बाँध दिया। युद्ध के दौरान जब मकरध्वज ने अपने जन्म की कथा सुनाई, तब हनुमान जी को ज्ञात हुआ कि यह वीर तो उन्हीं का पुत्र है। पिता-पुत्र के इस मिलन ने युद्ध को स्नेह में बदल दिया।

श्रीराम और लक्ष्मण को मुक्त कराने तथा अहिरावण का वध करने के पश्चात, भगवान श्रीराम ने प्रसन्न होकर वीर मकरध्वज को ही पाताल-लंका का राजा नियुक्त किया। यह प्रसंग हनुमान जी के अद्भुत पराक्रम के साथ-साथ उनके वात्सल्य और न्यायप्रियता को भी प्रकट करता है। बेट द्वारका के इस मंदिर में इसी पावन मिलन की स्मृति को जीवंत रखा गया है, जहाँ पिता हनुमान और पुत्र मकरध्वज एक साथ पूजे जाते हैं।

मंदिर की एक विशेष मान्यता यह है कि यहाँ की दोनों मूर्तियाँ स्वयं-प्रकट मानी जाती हैं और समय के साथ इनका आकार धीरे-धीरे बढ़ता प्रतीत होता है। भक्त यहाँ श्रद्धा से बजरंगबली और मकरध्वज दोनों को नमन करते हैं। कहा जाता है कि इस स्थान पर संतान-सुख और पारिवारिक एकता की कामना विशेष रूप से पूर्ण होती है। मंगलवार और शनिवार को यहाँ भक्तों की विशेष भीड़ रहती है, और द्वारकाधीश के दर्शन को आने वाले तीर्थयात्री इस अनोखे धाम में भी अवश्य आते हैं।

बेट द्वारका का हनुमान-मकरध्वज मंदिर की महिमा यही संदेश देती है कि बजरंगबली केवल शक्ति और वीरता के ही नहीं, बल्कि करुणा, स्नेह और धर्म के भी सागर हैं। पिता-पुत्र के इस दिव्य मिलन का यह धाम पारिवारिक प्रेम और एकता का अमर प्रतीक है। जो भी सच्चे हृदय से यहाँ शीश नवाता है, उसे बजरंगबली अपनी कृपा से बल, रक्षा और पारिवारिक सुख का वरदान प्रदान करते हैं।

🔗 Open Link / Video →

Related Stories

Salasar Balaji, Churu — Kisan Ko Murti Milna

सालासर बालाजी, चूरू — किसान को मूर्ति मिलना

Hanuman Mandir Katha
Mehandipur Balaji, Dausa — Pret Badha Se Mukti

मेहंदीपुर बालाजी, दौसा — प्रेत बाधा से मुक्ति

Hanuman Mandir Katha
Khole Ke Hanuman Ji, Jaipur

खोले के हनुमान जी, जयपुर

Hanuman Mandir Katha
Sankat Mochan Mandir, Varanasi — Tulsidas Dwara Sthapna

संकटमोचन मंदिर, वाराणसी — तुलसीदास द्वारा स्थापना

Hanuman Mandir Katha
Hanuman Garhi, Ayodhya

हनुमान गढ़ी, अयोध्या

Hanuman Mandir Katha
Jakhu Mandir, Shimla — Sanjivani Prasang Se Juda

जाखू मंदिर, शिमला — संजीवनी प्रसंग से जुड़ा

Hanuman Mandir Katha