Devnarayan Ji

Ujdeda Kheda Basvaya

उजडेड़ा खेड़ा बसवाया

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उजडेड़ा खेड़ा बसवाया, धिन-धिन नारायण थारी माया ॥ टेक ॥ साढू माता रे सपने आया, मनड़ा माई रे धीरज बंधाया । ओ साढू मन में हरसाया ॥ धिन-धिन नारायण थारी माया ॥1॥ ऐ मालासर में देव पधारया, ऐ साढू रे मन में खुशियां लाया । ओ जंगल में मंगल करवाया ॥ धिन-धिन नारायण थारी माया ॥2॥ ऐ राणाजी घबरावण लागा, ऐ सुता राणा के देव सपना में आगा । ऐ गढ़ रा कांगरा घडवाया ॥ धिन-धिन नारायण थारी माया ॥3॥ ऐ राणा जी से झगड़ो झेल्यो, ऐ चोईस भाया रो बदलो लियो । ऐ घर-घर में नारायण पुजवाया ॥ धिन-धिन नारायण थारी माया ॥4॥ पीरू भोपो देव चरणा रो चाकर, प्रेमी नाथ थारा गुण गाया ॥ धिन-धिन नारायण थारी माया ॥5॥

✍️ रचयिता: पीरू भोपो

इस भजन के बारे में

यह भजन लोकदेवता बाबा रामदेव जी (रामसा पीर) की महिमा को समर्पित है। इसका भावार्थ यह है कि बाबा रामदेव जी ने उजड़े हुए स्थान को अपनी कृपा से पुनः बसाया और खुशहाल बनाया। यह भजन उनकी अद्भुत माया और शक्ति का गुणगान करता है, जो भक्तों के जीवन में सुख और शांति लाती है। इसमें बाबा के जन्म से जुड़ी कथाओं, जैसे माता मेणादे (साढू माता) के स्वप्न और उनके द्वारा किए गए चमत्कारों का वर्णन है।

भक्त इस भजन को विशेष रूप से बाबा रामदेव जी के मेलों, जागरणों और उनके प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करने के लिए गाते हैं। इसे गाने का मुख्य उद्देश्य बाबा का आशीर्वाद प्राप्त करना और अपने जीवन के दुखों को दूर करना है। यह भजन मन में विश्वास जगाता है कि जिस प्रकार बाबा ने उजड़े हुए खेड़े को बसाया, उसी प्रकार वे भक्तों के जीवन में भी खुशहाली लाएंगे। इसे गाते समय भक्त स्वयं को बाबा के चरणों में समर्पित महसूस करते हैं और उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हैं।

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