Narayan Suto Jal Ki Teer
नारायण सूतो जल कि तीर
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नारायण सूतो जल कि तीर जगायो जद जाग्यो क्योना र
ये गुर्जर कि ठण्डी चाले भाल नींद को झोट्यो आगो र ॥ टेक ॥
नारायण क्यों पकड़या छा म्हारो हाथ कांडे तो म्हारो जन्म बिगाड़यो र
ऐ गुर्जर कि बालक छा नादान दादो जी म्हारो ब्यावलो रचायो र ॥1॥
ऐ नारायण वचन देर म्हाने ल्यायो तीरा पे म्हाने क्यों बिसरायो र
गुर्जर कि न्हावो धोवो हो जाओ तैयार बाबा जी कि टेक तो निभावा र ॥2॥
नारायण बैठ कदम कि दाल गुजरिया कि चाल पहचानी र
नारायण गुर्जर बिरदीचन्द थारे आज, बालका कि लाज तो बचाओ र ॥3॥
✍️ रचयिता: बिरदीचन्द
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