Devnarayan Ji

Sahiyan Mhari Gaao Ae Bajao Gad Ki Gujariya

सहिया म्हारी गाओ ऐ बजाओ गढ़ की गुजरिया

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सहिया म्हारी गाओ ऐ बजाओ गढ़ की गुजरिया म्हारा नारायण का गाओ मंगल चार,,, म्हारे देव पधारिया पावणा ॥ ॥ टेक ॥ थाने धन्य धन्य म्हारी मालसैरी डुंगरियाँ। बठे जनमिया जनमिया मिलोकी का नाथ ॥ नारायण आया पावणा.......॥1॥ सैया मारी कंकर फुटिया कवल निकल्य। ये तो कवल में खिल्यो अवतार ॥ नारायण आया पावणा....... ॥2॥ देवजी जन्मे बाज्या चंग ढोलड़ा। या तो महला में बाजी सोबन ताल ॥ नारायण आया पावणा....... ॥3॥ हीरा म्हारी पीली गोबर की देदे गुंदली। हीरा म्हारी मोतियां का चौक पुराया नारायण ॥ नारायण आया पावणा....... ॥4॥ हीरा म्हारी जाओ जोशी ने बेगो बुलावच्छो। म्हारा नारायण को निकल लेतो नाम ॥ नारायण आया पावणा....... ॥5॥ जोशी जुना पुराना कांडे टिपणा। म्हारा उदल को कढ़वा लेतो नाम ॥ नारायण आया पावणा....... ॥6॥ नारायण पीरू भोपा की सुनजो बिनती। देव जी गावै गावै थांका गुण गान। भक्ता ने लीज्यो राख ज्यूँ ॥ नारायण आया पावणा....... ॥7॥ देव जी चम्मा लाल शरण में आवयो। देव जी जत देवे चरणां माथे धोक। बांकी मैया पार लगावच्चो ॥ सहिया म्हारी गाओ ए बजाओ गढ़ की गुजरिया....... ॥8॥

✍️ रचयिता: चम्मा लाल

इस भजन के बारे में

यह भजन लोक-देवता भगवान देवनारायण जी के प्राकट्य और उनके स्वागत में गाया जाने वाला एक अत्यंत मधुर राजस्थानी लोक-भजन है। इसमें भक्त अपनी सखियों को बुलाकर भगवान के आगमन की खुशी में मंगल गीत गाने और वाद्य यंत्र बजाने का आह्वान कर रहे हैं। इस भजन का भावार्थ यह है कि जिस प्रकार मालसेरी की डूंगरी पर कमल के फूल से भगवान देवनारायण का अवतार हुआ, उसी प्रकार हमारे हृदय रूपी आंगन में भी प्रभु पधारें और हमारे जीवन को मंगलमय बना दें।

यह भजन मुख्य रूप से भगवान देवनारायण के जन्मोत्सव और उनके प्रति श्रद्धा प्रकट करने के लिए गाया जाता है। भक्त इसे विशेष अवसरों, मेलों और देवनारायण जी के मंदिरों में बड़े उत्साह के साथ गाते हैं। इस भजन को गाने से मन में सात्विक आनंद का संचार होता है और भक्त स्वयं को प्रभु के सानिध्य में अनुभव करते हैं। यह भजन हमें याद दिलाता है कि जब ईश्वर का नाम लिया जाता है, तो पूरा वातावरण भक्तिमय और पवित्र हो जाता है। इसे गाने से मन की शांति और प्रभु की कृपा की प्राप्ति होती है।

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