Sahiyan Mhari Gaao Ae Bajao Gad Ki Gujariya
सहिया म्हारी गाओ ऐ बजाओ गढ़ की गुजरिया
Loading…
✍️ रचयिता: चम्मा लाल
इस भजन के बारे में
यह भजन लोक-देवता भगवान देवनारायण जी के प्राकट्य और उनके स्वागत में गाया जाने वाला एक अत्यंत मधुर राजस्थानी लोक-भजन है। इसमें भक्त अपनी सखियों को बुलाकर भगवान के आगमन की खुशी में मंगल गीत गाने और वाद्य यंत्र बजाने का आह्वान कर रहे हैं। इस भजन का भावार्थ यह है कि जिस प्रकार मालसेरी की डूंगरी पर कमल के फूल से भगवान देवनारायण का अवतार हुआ, उसी प्रकार हमारे हृदय रूपी आंगन में भी प्रभु पधारें और हमारे जीवन को मंगलमय बना दें।
यह भजन मुख्य रूप से भगवान देवनारायण के जन्मोत्सव और उनके प्रति श्रद्धा प्रकट करने के लिए गाया जाता है। भक्त इसे विशेष अवसरों, मेलों और देवनारायण जी के मंदिरों में बड़े उत्साह के साथ गाते हैं। इस भजन को गाने से मन में सात्विक आनंद का संचार होता है और भक्त स्वयं को प्रभु के सानिध्य में अनुभव करते हैं। यह भजन हमें याद दिलाता है कि जब ईश्वर का नाम लिया जाता है, तो पूरा वातावरण भक्तिमय और पवित्र हो जाता है। इसे गाने से मन की शांति और प्रभु की कृपा की प्राप्ति होती है।
क्या ठीक नहीं है? चुनें — admin जल्दी सुधार देगा।