Devnarayan Ji

Leelan Mhari Jaije Jaije

लीळण म्हारी जाइजे जाइजे

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लीळण घोड़ी सोवणी रे, मोतियाँ जड़ी लगाम। खरनाल्या रा तेजाजी ने, झुक-झुक करूँ प्रणाम।। दोहा लीळण म्हारी जाइजे जाइजे, गढ़ खरनाले शहर। कोई गढ़ खरनाले शहर, भाभल ने निवण देवजे।। टेक ॥ ओ तेजाजी कैया जांवा, खाली म्हारी पीठ। कोई सुनी म्हारी पीठ, मावड़ली देशी ओळबा।।1॥ ओ लीळण म्हारी कहिजे कहिजे, साचोडा समचार। तू तो साचोडा समचार, नजरा सु देखी केवजो।।2॥ ओ तेजाजी ऐडा काई, लिखिया विधाता लेख। म्हारा लिखिया विधाता लेख, तेजल सु छेती में पड़ा।।3॥ ओ लीळण म्हारी राखो राखो, मनड़ा माहि धीर। कोई हिवड़ा माहि धीर, स्वर्गा में मिलसी जिवडा।।4॥ ओ तेजाजी था बिन, म्हारे जीवन को नहीं सार। म्हारे जीवन को नहीं सार, लीळण भी संग में चालसी।।5॥ ओ लीळण म्हारी मैं थारो चंदो, तू म्हारी है चकोर। म्हारे काजलिये री कोर, मानु में थाने जिव री जड़ी।।6॥ ओ लीळण म्हारी मत ना तू तो, आसुडा ढलकाय। मत आसुडा ढलकाय, तेजल रो कापे जिवडो।।7॥

✍️ रचयिता: लोकगीत

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