Ganga Ji

Om Jai Gange Mata

ॐ जय गंगे माता

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ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता। जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता ॥ टेक ॥ चंद्र सी जोत तुम्हारी, जल निर्मल बहता। शरण पड़े जो तेरी, सो सुख दुःख को सहता ॥1॥ पुत्र सगर के तारे, भवसागर तारे। सब विधि सुख उपजावै, हरि पद को प्यारे ॥2॥ ब्रह्मा जी के कमंडल, अति शोभा पावै। शिव की जटा से निकली, सुर-मुनि जन गावै ॥3॥ विष्णु पदब्ज संभूता, सकल लोक वंदित। कलि मल हारिणी गंगे, अति सुख आनंदित ॥4॥ सूरज चंद्र सलोने, तेरी आरती गावें। वेद पुराण उपनिषद, सब यश गुण गावें ॥5॥ काशीपुरी विराजे, शिवशंकर स्वामी। भक्ति भाव से जो ध्यावै, सो सद्गति पावै ॥6॥ जो कोई यह आरती, भक्ति सहित गावै। गंगा माता की कृपा, सब सुख-संपत्ति पावै ॥7॥

✍️ रचयिता: परंपरागत

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