
सिंदूर, चोला और बूँदी के लड्डू चढ़ाने की कथाएँ
Sindoor, Chola aur Boondi Ke Laddu Chadhane Ki Kathayein
हनुमान जी की पूजा में सिंदूर, चोला और बूँदी के लड्डू का विशेष महत्व है। इन तीनों के अर्पण के पीछे भक्ति से भरी सुंदर कथाएँ हैं, जो हनुमान जी के अपने प्रभु श्रीराम के प्रति अनन्य प्रेम को प्रकट करती हैं। यही कारण है कि हनुमान मंदिरों में इनका चढ़ावा अत्यंत प्रिय और मंगलकारी माना जाता है।
सिंदूर चढ़ाने की कथा सबसे भावपूर्ण है। कहते हैं कि एक दिन हनुमान जी ने माता सीता को अपनी माँग में सिंदूर लगाते देखा। जिज्ञासावश उन्होंने माता से पूछा कि वे यह सिंदूर क्यों लगाती हैं। माता सीता ने स्नेहपूर्वक उत्तर दिया कि इससे उनके स्वामी श्रीराम की आयु बढ़ती है और उनका सौभाग्य अखंड रहता है। यह सुनकर हनुमान जी के मन में विचार आया कि जब थोड़े से सिंदूर से प्रभु का इतना कल्याण होता है, तो यदि वे अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लें, तो प्रभु श्रीराम को कितनी अधिक आयु और सौभाग्य प्राप्त होगा। इसी शुद्ध और सरल भक्ति-भाव से हनुमान जी ने अपने सम्पूर्ण शरीर पर सिंदूर लगा लिया।
जब प्रभु श्रीराम ने हनुमान जी को इस रूप में देखा, तो उनका हृदय अपने सेवक के अनन्य प्रेम से भर उठा। उन्होंने प्रसन्न होकर आशीर्वाद दिया कि जो भी भक्त हनुमान जी को सिंदूर अर्पित करेगा, उसके सारे कष्ट दूर होंगे और उस पर हनुमान जी की विशेष कृपा रहेगी। इसी कारण आज भी भक्त हनुमान जी को श्रद्धापूर्वक सिंदूर और चमेली के तेल में मिश्रित सिंदूर का चोला चढ़ाते हैं।
चोला चढ़ाने की परंपरा भी इसी भाव से जुड़ी है। चोला अर्थात हनुमान जी की मूर्ति पर सिंदूर, चमेली का तेल और वस्त्र का समग्र शृंगार। जब कोई भक्त हनुमान जी को चोला अर्पित करता है, तो वह मानो अपने आराध्य को उसी सिंदूरमय रूप में सजाता है जिसमें उन्होंने प्रभु श्रीराम के प्रति अपना प्रेम प्रकट किया था। मंगलवार और शनिवार को चोला चढ़ाना विशेष फलदायी माना जाता है, और भक्त इसे अपने मन की मनोकामना पूर्ण होने पर आभार-स्वरूप भी अर्पित करते हैं।
बूँदी के लड्डू का भोग भी हनुमान जी को अत्यंत प्रिय माना गया है। भक्ति परंपरा में यह विश्वास है कि हनुमान जी बलशाली होने के साथ ही सरल हृदय और सात्विक स्वभाव के हैं, इसलिए उन्हें सादा किंतु मधुर बूँदी के लड्डू का भोग बहुत भाता है। जब भक्त श्रद्धा से यह भोग अर्पित करता है, तो हनुमान जी उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर उसकी मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं। यही प्रसाद बाद में भक्तों में बाँटा जाता है, जिससे सबको हनुमान जी की कृपा का अंश प्राप्त होता है।
इन तीनों चढ़ावों में सबसे बड़ी बात भक्त का भाव है। सिंदूर हनुमान जी के प्रभु-प्रेम का प्रतीक है, चोला उनके प्रति समर्पण का, और बूँदी के लड्डू सरल भक्ति का। जो भक्त इन्हें दिखावे के लिए नहीं, बल्कि सच्चे हृदय से अर्पित करता है, उस पर पवनपुत्र की अपार कृपा बरसती है।
इनकी महिमा यही है कि जो श्रद्धा से हनुमान जी को सिंदूर, चोला और बूँदी के लड्डू अर्पित करता है, उसके जीवन के संकट दूर होते हैं, मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और उस पर सदा हनुमान जी की रक्षक छाया बनी रहती है।