
बजरंग बाण और संकटमोचन स्तोत्र की महिमा
Bajrang Baan aur Sankatmochan Stotra Ki Mahima
हनुमान जी को संकटमोचन कहा जाता है, क्योंकि जो भी सच्चे हृदय से उनकी पुकार करता है, उसके सारे संकट वे क्षण भर में हर लेते हैं। भक्तों की इसी अटूट श्रद्धा से दो अत्यंत प्रभावशाली स्तुतियाँ प्रकट हुईं — बजरंग बाण और संकटमोचन हनुमानाष्टक। इन दोनों की रचना के पीछे भक्त की पीड़ा और पवनपुत्र की कृपा की गहरी कथा जुड़ी हुई है।
संकटमोचन स्तोत्र, जिसे संकटमोचन हनुमानाष्टक भी कहते हैं, की रचना का श्रेय गोस्वामी तुलसीदास जी को दिया जाता है। कथा कहती है कि तुलसीदास जी अनेक बार जीवन में गहरे संकटों से घिरे। कभी शारीरिक व्याधि, कभी शत्रुओं का भय, तो कभी असहनीय पीड़ा। ऐसे प्रत्येक अवसर पर उन्होंने बाहरी सहारे नहीं ढूँढे, बल्कि अपने प्रिय हनुमान जी को ही पुकारा। उसी विह्वल पुकार से, जिसमें भक्त अपनी हर विपत्ति में केवल हनुमान का नाम लेता है, यह अष्टक प्रकट हुआ, जिसमें बार-बार यही भाव दोहराया गया कि हे संकटमोचन, अब कौन है जो हमारी विपत्ति हरेगा।
बजरंग बाण की महिमा तो और भी अद्भुत मानी जाती है। इसे भक्तों के बीच एक ऐसा अमोघ अस्त्र माना गया है जो बाण की भाँति सीधा लक्ष्य पर लगता है। जैसे बाण बीच में रुकता नहीं, वैसे ही श्रद्धा से किया गया इसका पाठ शीघ्र ही अपना फल देता है। यही कारण है कि जब कोई भक्त किसी भारी संकट, भय, तंत्र-बाधा या नकारात्मक शक्ति से घिरा होता है, तो वह हनुमान जी की शरण में बजरंग बाण का पाठ करता है और स्वयं को सुरक्षित अनुभव करता है।
इन स्तुतियों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनमें भक्त हनुमान जी को केवल स्तुति ही नहीं करता, बल्कि उन्हें अपने प्रभु श्रीराम की शपथ देकर, राम-लक्ष्मण और सीता का स्मरण दिलाकर पुकारता है। यह भाव इतना करुण और सामर्थ्यवान है कि कहा जाता है हनुमान जी अपने भक्त की ऐसी पुकार अनसुनी नहीं कर सकते। जहाँ प्रभु श्रीराम का नाम हो, वहाँ पवनपुत्र स्वयं दौड़े चले आते हैं।
भक्तों का अनुभव है कि श्रद्धापूर्वक इनका पाठ करने से मन का भय दूर होता है, शत्रु शांत होते हैं, रोग और बाधाएँ घटती हैं तथा हृदय में अद्भुत साहस और स्थिरता आती है। मंगलवार और शनिवार को इनका पाठ विशेष फलदायी माना गया है। पर स्तुति की असली शक्ति शब्दों में नहीं, उस भाव में है जिससे भक्त हनुमान जी को अपना सहारा मानकर उन्हें पुकारता है।
इसकी महिमा यही है कि बजरंग बाण और संकटमोचन स्तोत्र सच्चे मन से पढ़ने वाले भक्त पर सदा पवनपुत्र की छाया बनी रहती है, और उसका कोई भी संकट हनुमान जी की कृपा से टिक नहीं पाता।