
सिद्धिविनायक मंदिर, मुंबई
Siddhivinayak Mandir, Mumbai
महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई के प्रभादेवी क्षेत्र में विराजमान सिद्धिविनायक मंदिर भारत के सर्वाधिक पूजित और प्रसिद्ध गणेश धामों में से एक है। यहाँ भगवान गजानन "सिद्धिविनायक" के रूप में विराजते हैं, अर्थात् वे विनायक जो अपने भक्तों की मनोकामनाएँ शीघ्र सिद्ध कर देते हैं। प्रातःकाल से ही मंदिर के प्रांगण में भक्तों की लंबी कतारें लग जाती हैं, और मंगलवार के दिन तो सारा प्रभादेवी मानो गणपति बप्पा के जयघोष से गूँज उठता है।
कहा जाता है कि इस मंदिर की स्थापना सन् उन्नीसवीं शताब्दी के आरंभ में हुई थी। एक श्रद्धालु महिला श्रीमती देउबाई पाटील, जिनकी कोई संतान नहीं थी, ने भगवान गणेश से यह प्रार्थना की कि उनके नाम पर एक ऐसा मंदिर बने जहाँ आने वाली निःसंतान स्त्रियों की गोद गणपति की कृपा से भर जाए। उनकी इसी भावभरी मनोकामना और दानशीलता से इस छोटे किंतु दिव्य मंदिर का निर्माण हुआ, और समय के साथ यह करुणा और सिद्धि का महान केंद्र बन गया।
मंदिर के गर्भगृह में विराजमान गणेश जी की मूर्ति एक ही काले पाषाण से तराशी हुई है और लगभग ढाई फुट ऊँची है। इस मूर्ति की सबसे अद्भुत विशेषता यह है कि इसकी सूँड दाहिनी ओर मुड़ी हुई है। शास्त्रों में दाहिनी सूँड वाले गणपति को "सिद्धिपीठ" से जुड़ा और अत्यंत जागृत माना जाता है। मूर्ति के दोनों ओर ऋद्धि और सिद्धि विराजमान हैं, जो समृद्धि और सफलता की प्रतीक मानी जाती हैं, इसीलिए यहाँ के गणपति को सिद्धिविनायक कहा जाता है।
इस मंदिर से जुड़ी एक सुंदर परंपरा है कि यहाँ आने वाला भक्त पहले उलटी परिक्रमा करता है और फिर गणपति के सम्मुख अपनी मनोकामना निवेदित करता है। लोक-विश्वास है कि सच्चे मन से माँगी गई कोई भी शुभ कामना यहाँ अवश्य पूर्ण होती है। यही कारण है कि विद्यार्थी परीक्षा से पूर्व, व्यापारी नए व्यवसाय के आरंभ में, और नवविवाहित दंपती अपने गृहस्थ जीवन के मंगल के लिए यहाँ मस्तक झुकाने अवश्य आते हैं।
समय के साथ इस मंदिर की ख्याति देश-विदेश तक फैल गई। फिल्म जगत के कलाकार, उद्योगपति, नेता और साधारण जन—सभी बिना किसी भेद के गणपति बप्पा के चरणों में समान भाव से नतमस्तक होते हैं। यहाँ न कोई ऊँच-नीच है, न धनी-निर्धन का अंतर; गणेश जी की दृष्टि में सब उनके प्यारे बालक हैं। इसी समता और करुणा के कारण यह स्थान भक्ति का महान संगम बन गया है।
सिद्धिविनायक मंदिर की महिमा केवल उसकी भव्यता में नहीं, अपितु उस अटूट श्रद्धा में है जो प्रतिदिन लाखों हृदयों को यहाँ खींच लाती है। जो भक्त सच्चे मन, शुद्ध भाव और विनम्र प्रार्थना के साथ यहाँ आता है, वह विघ्नहर्ता की कृपा से भरकर लौटता है। मंगलमूर्ति मोरया के जयघोष के साथ, यह पावन धाम आज भी असंख्य श्रद्धालुओं के जीवन में सिद्धि, समृद्धि और शांति की वर्षा करता रहता है।