
खजराना गणेश मंदिर, इंदौर
Khajrana Ganesh Mandir, Indore
मध्य प्रदेश के इंदौर नगर के खजराना क्षेत्र में स्थित श्री खजराना गणेश मंदिर भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण करने वाला एक अत्यंत जागृत और प्रसिद्ध देवस्थान है। यहाँ विराजमान गणपति को लोग प्रेम से "मनोकामना पूर्ण करने वाले गणेश" कहते हैं। बुधवार और गणेश चतुर्थी के अवसर पर यहाँ श्रद्धालुओं का समुद्र उमड़ पड़ता है, और सारा वातावरण भक्ति की सुगंध से भर जाता है।
इस मंदिर की स्थापना की कथा होल्कर राजवंश की महारानी अहिल्याबाई होल्कर से जुड़ी हुई है, जिनकी धर्मपरायणता और मंदिर-निर्माण की भावना समस्त भारत में प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि किसी समय आक्रमणकारियों के भय से इस क्षेत्र के भक्तों ने गणेश जी की मूर्ति को एक कुएँ में छिपा दिया था, ताकि उसका अपमान न हो। कालांतर में एक साधु-पंडित को स्वप्न में स्वयं गणपति ने आकर उस स्थान का संकेत दिया जहाँ उनकी मूर्ति दबी हुई थी।
स्वप्न-आदेश के अनुसार खोज करने पर सचमुच वहाँ कुएँ से गणेश जी की दिव्य मूर्ति प्रकट हुई। जब यह समाचार अहिल्याबाई होल्कर तक पहुँचा तो उन्होंने अत्यंत श्रद्धा-भाव से उसी स्थान पर भव्य मंदिर का निर्माण करवाया और मूर्ति को विधिपूर्वक प्रतिष्ठित किया। तभी से खजराना गणेश की प्रसिद्धि निरंतर बढ़ती चली गई और यह स्थान मालवा अंचल की आस्था का केंद्र बन गया।
खजराना गणेश मंदिर से जुड़ी एक विशेष परंपरा भक्तों को यहाँ बार-बार खींच लाती है। यहाँ आने वाले श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना के साथ गणपति की पीठ पर उलटा स्वस्तिक बनाते हैं और मन्नत माँगते हैं। जब वह कामना पूरी हो जाती है, तब वे पुनः आकर उस स्वस्तिक को सीधा करते हैं और गणेश जी को धन्यवाद अर्पित करते हैं। इस अनूठी परंपरा के कारण मंदिर की दीवारें असंख्य स्वस्तिक चिह्नों से भरी रहती हैं, जो हर एक पूरी हुई मनोकामना की मूक साक्षी हैं।
समय के साथ इस मंदिर का विस्तार होता गया और आज इसके प्रांगण में अनेक देवी-देवताओं के छोटे मंदिर भी सुशोभित हैं। श्रद्धालु यहाँ मोदक, लड्डू और नारियल का भोग अर्पित करते हैं, और मंदिर के आसपास सजी प्रसाद व फूल-मालाओं की दुकानें भक्ति के इस उल्लास को और बढ़ा देती हैं। नए वाहन, नए व्यापार अथवा किसी शुभ कार्य के आरंभ में यहाँ पूजा कराना इंदौरवासियों की श्रद्धा का अभिन्न अंग बन चुका है।
खजराना गणेश की महिमा उनके भक्तवत्सल स्वभाव में निहित है। जो भी सच्चे हृदय और विश्वास के साथ यहाँ आकर अपनी पुकार गणपति के चरणों में रखता है, गजानन उसकी सुध अवश्य लेते हैं। यह मंदिर आज भी लाखों भक्तों के जीवन में आशा, विश्वास और मंगल का दीप जलाता है, और गणपति बप्पा मोरया का जयघोष यहाँ की हवाओं में सदा गूँजता रहता है।