
मोती डूंगरी गणेश मंदिर, जयपुर
Moti Dungri Ganesh Mandir, Jaipur
राजस्थान की गुलाबी नगरी जयपुर में एक छोटी-सी पहाड़ी—मोती डूंगरी—की तलहटी में विराजमान श्री गणेश जी का मंदिर समूचे राजस्थान की आस्था का हृदय है। यहाँ के गणपति "मोती डूंगरी गणेश" के नाम से विख्यात हैं और उन्हें जयपुरवासियों का प्रथम आराध्य माना जाता है। बुधवार के दिन तथा गणेश चतुर्थी पर यहाँ भक्तों की अपार भीड़ उमड़ती है, और सारा प्रांगण घंटी-नाद तथा जयघोष से गूँज उठता है।
इस मंदिर की स्थापना की कथा लगभग दो शताब्दी पुरानी बताई जाती है और यह जयपुर के राजपरिवार से जुड़ी है। कहा जाता है कि गणेश जी की यह दिव्य मूर्ति अत्यंत प्राचीन है और इसे बड़ी श्रद्धा के साथ राजस्थान लाया गया। जनश्रुति के अनुसार एक बैलगाड़ी में यह मूर्ति यात्रा पर थी, और शर्त यह थी कि जहाँ बैलगाड़ी अपने-आप रुक जाएगी, वहीं मूर्ति की स्थापना होगी। मोती डूंगरी की तलहटी में पहुँचते ही बैलगाड़ी रुक गई और उठ न सकी, तब भक्तों ने इसे गणेश जी की इच्छा मानकर वहीं भव्य मंदिर बनवाया।
मंदिर की स्थापत्य कला अत्यंत मनोहर है। श्वेत संगमरमर से निर्मित इसकी दीवारों पर की गई नक्काशी और विशाल प्रवेश-द्वार देखने वालों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। गर्भगृह में विराजमान सिंदूरी वर्ण के गणपति की छवि इतनी सौम्य और तेजोमय है कि दर्शन मात्र से भक्त का हृदय भक्ति-भाव से भर जाता है। मूर्ति को सुंदर वस्त्रों और आभूषणों से सुसज्जित किया जाता है, और उनके श्रीचरणों में मोदक-लड्डुओं का भोग अर्पित किया जाता है।
मोती डूंगरी गणेश से जयपुरवासियों का संबंध अत्यंत आत्मीय है। यह लोक-परंपरा है कि जब भी कोई नया वाहन खरीदता है, तो सबसे पहले उसे मोती डूंगरी गणेश के मंदिर लाकर पूजा-अर्चना कराता है, ताकि वह वाहन सदा मंगलमय और दुर्घटनारहित रहे। बुधवार के दिन तो मंदिर के बाहर सैकड़ों नए वाहनों की कतार लग जाती है, और पुजारीगण गणपति का आशीर्वाद स्वरूप सिंदूर व मौली से उनका पूजन करते हैं।
गणेश चतुर्थी के अवसर पर यहाँ विशाल मेला लगता है जो कई दिनों तक चलता है। मंदिर को असंख्य दीपों और फूलों से सजाया जाता है, और लाखों भक्त लंबी कतारों में खड़े होकर बप्पा के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त करते हैं। इस दौरान सारा वातावरण भजन-कीर्तन और "गणपति बप्पा मोरया" के उद्घोष से भर उठता है, मानो स्वयं गजानन अपने भक्तों के बीच विराजमान होकर उनकी भक्ति स्वीकार कर रहे हों।
मोती डूंगरी गणेश की महिमा उनके भक्तवत्सल और शीघ्र प्रसन्न होने वाले स्वभाव में निहित है। जो भी सच्चे हृदय से यहाँ आकर अपनी मनोकामना निवेदित करता है, विघ्नहर्ता गणेश उसकी बाधाएँ दूर कर देते हैं। यह पावन धाम आज भी असंख्य श्रद्धालुओं के जीवन में सुख-समृद्धि, सुरक्षा और मंगल का दीप प्रज्वलित करता रहता है, और जयपुर की आस्था का यह केंद्र सदा गणपति की कृपा से जगमगाता रहता है।