Shani Ko Ravan Ki Kaid Se Mukt Karana

शनि को रावण की कैद से मुक्त कराना

Shani Ko Ravan Ki Kaid Se Mukt Karana

हनुमान जी की महिमा में एक अत्यंत रोचक कथा शनि देव की मुक्ति की भी है। यह कथा उस समय की है जब हनुमान जी माता सीता की खोज में लंका पहुँचे थे। लंका में उन्होंने न केवल सीता माता के दर्शन किए, बल्कि रावण के अहंकार और अत्याचार का भी प्रत्यक्ष अनुभव किया। इसी दौरान उन्हें ज्ञात हुआ कि रावण ने अपनी शक्ति के मद में देवताओं और नवग्रहों तक को बंदी बना रखा है।

कथा के अनुसार, रावण अत्यंत बलशाली और अभिमानी था। उसने अपने पराक्रम से नवग्रहों को जीतकर उन्हें अपने महल में बंदी बना लिया था। वह चाहता था कि सभी ग्रह उसके नियंत्रण में रहें और सदा उसके अनुकूल फल दें, ताकि उसका राज्य और वैभव अखंड बना रहे। इन्हीं बंदी ग्रहों में शनि देव भी थे, जिन्हें रावण ने अत्यंत अपमानजनक स्थिति में जकड़ रखा था। किसी को अपने अधीन रखकर उसका अपमान करना रावण के अहंकार का स्वभाव बन गया था।

जब हनुमान जी लंका में विचरण कर रहे थे, तब उनकी दृष्टि उन बंदी ग्रहों पर पड़ी जो असहाय अवस्था में पड़े थे। दयालु हृदय हनुमान जी से यह अन्याय देखा न गया। उन्होंने अपने अपार बल से रावण के उन बंधनों को तोड़ दिया और शनि देव सहित बंदी ग्रहों को उस कारागार से मुक्त कर दिया। मुक्त होते ही ग्रहों ने राहत की साँस ली और हनुमान जी के प्रति कृतज्ञता प्रकट की।

शनि देव, जो लंबे समय से रावण की कैद में कष्ट भोग रहे थे, हनुमान जी की इस उदारता और सामर्थ्य से अत्यंत प्रभावित हुए। उन्होंने हनुमान जी के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया और उन्हें आशीर्वाद दिया। कहा जाता है कि इसी उपकार के कारण शनि देव ने हनुमान जी के भक्तों को कभी पीड़ा न देने का भाव अपने हृदय में और भी दृढ़ कर लिया। जिसने अपने कठिन समय में सहायता की, उसके भक्तों को कष्ट देना शनि देव को कदापि स्वीकार न था।

यह कथा हमें सिखाती है कि हनुमान जी केवल शक्ति के ही प्रतीक नहीं, बल्कि करुणा और न्याय के भी मूर्त रूप हैं। जहाँ अन्याय और अत्याचार होता है, वहाँ वे निर्बल की रक्षा के लिए स्वयं आगे आते हैं। रावण जैसे बलशाली की कैद से देवताओं और ग्रहों को मुक्त कराना हनुमान जी की उसी करुणामयी शक्ति का परिचय है।

इसी कारण भक्त मानते हैं कि जिन पर शनि की अशुभ दशा या साढ़ेसाती का प्रभाव हो, उन्हें हनुमान जी की शरण लेनी चाहिए। जिसने स्वयं शनि देव को बंधन से मुक्त कराया, वही अपने भक्तों को ग्रह-पीड़ा और संकटों से मुक्त करने में समर्थ हैं।

इस कथा की महिमा यही है कि हनुमान जी की भक्ति करने वाले पर शनि सहित किसी भी ग्रह की अशुभ छाया नहीं टिकती, और उसका जीवन पवनपुत्र की कृपा से सदा सुरक्षित और मंगलमय बना रहता है।

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