
हनुमान जयंती की कथा
Hanuman Jayanti Ki Katha
हनुमान जयंती वह पावन पर्व है जिस दिन संकटमोचन, पवनपुत्र हनुमान जी का इस धरती पर प्रादुर्भाव हुआ था। यह दिन समस्त हनुमान भक्तों के लिए अत्यंत हर्ष और उल्लास का अवसर होता है। इस दिन मंदिरों में विशेष पूजा, कीर्तन, सुंदरकांड पाठ और शोभायात्राएँ होती हैं, और सर्वत्र हनुमान जी की जय-जयकार गूँजती है।
हनुमान जी के जन्म की कथा माता अंजना से जुड़ी है। माता अंजना एक परम पतिव्रता और तपस्विनी स्त्री थीं। उनकी बड़ी अभिलाषा थी कि उन्हें एक बलशाली, तेजस्वी और धर्मपरायण पुत्र प्राप्त हो। इसी कामना से उन्होंने वर्षों तक कठोर तपस्या और आराधना की। उनकी अटूट भक्ति और तप से प्रसन्न होकर उन्हें एक दिव्य पुत्र की प्राप्ति का वरदान मिला।
उसी काल में, राजा दशरथ ने संतान-प्राप्ति के लिए पुत्रेष्टि यज्ञ किया था और यज्ञ से प्राप्त पवित्र प्रसाद अपनी रानियों में बाँटा। कथा कहती है कि उस दिव्य प्रसाद का एक अंश वायु देव के माध्यम से माता अंजना तक पहुँचा। पवन देव ने वह अंश माता अंजना को ग्रहण कराया, और इसी कारण उनसे जो पुत्र उत्पन्न हुआ, वह वायु देव के अंश से युक्त, असीम बल और तेज का स्वामी हुआ। इसी कारण हनुमान जी को पवनपुत्र और वायुपुत्र कहा जाता है।
बाल्यकाल से ही हनुमान जी अत्यंत चंचल, बलशाली और अद्भुत थे। एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, बालक हनुमान ने आकाश में उदय होते हुए सूर्य को कोई पका हुआ फल समझ लिया और उसे खाने के लिए बड़े वेग से आकाश की ओर छलांग लगा दी। उनके इस अद्भुत साहस से देवता तक चकित रह गए। इस घटना में उन्हें अनेक दिव्य वरदान भी प्राप्त हुए, जिनसे वे अजर, अमर और अपार शक्तिशाली बने। ये सभी वरदान आगे चलकर प्रभु श्रीराम की सेवा में सार्थक हुए।
हनुमान जयंती के दिन भक्त प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं और हनुमान जी की विधिवत पूजा करते हैं। वे उन्हें सिंदूर, चमेली का तेल, लाल फूल और बूँदी के लड्डू अर्पित करते हैं तथा हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और बजरंग बाण का पाठ करते हैं। अनेक भक्त इस दिन उपवास रखते हैं और मंदिरों में सामूहिक कीर्तन एवं भंडारे का आयोजन करते हैं। पूरे दिन वातावरण भक्ति और उल्लास से भरा रहता है।
यह पर्व केवल हनुमान जी के जन्म का उत्सव नहीं, बल्कि उनकी अनन्य भक्ति, अपार शक्ति, विनम्रता और सेवा-भाव के स्मरण का अवसर भी है। हनुमान जी ने अपने सम्पूर्ण जीवन को प्रभु श्रीराम की सेवा में समर्पित कर दिखाया कि सच्ची शक्ति वही है जो भक्ति और सेवा में लगे। यही आदर्श हनुमान जयंती के दिन प्रत्येक भक्त के हृदय में पुनः जागृत होता है।
इस पर्व की महिमा यही है कि जो भक्त श्रद्धा और भक्ति से हनुमान जयंती मनाता है और इस दिन हनुमान जी की आराधना करता है, उसके सारे संकट दूर होते हैं, उसे बल, बुद्धि और साहस की प्राप्ति होती है, और उस पर सदा पवनपुत्र की कृपा बनी रहती है।