Ganesh Ji

Manakar Gauri Nandan Ko

गणेश व श्याम वन्दना

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मनाकर गौरी नन्दन को, भजो सब श्याम प्यारो को ॥ टेक ॥ पौत्र हैं भीम पाण्डु के, पुत्र घटोत्कच के हैं। माता हैं अहिलवती इनकी, जिताते हैं ये हारे को ॥1॥ दिखाया तेज जब अपना, कपट श्री कृष्ण ने कीना। शीश खुद काटकर दीन्हा, जगत के कारण हारे को ॥2॥ सत्य के थे सदा रक्षक, सत्य पर जान दे डारी। पड़ा तब नाम लख दाता, पता ये है हमारे को ॥3॥ हुआ जब युद्ध महाभारत, जड़ी से शीश रखा था। पुजोगे विश्व सारे में, दिया ये वर तुम्हारे को ॥4॥ अर्ज ये रूडमल की है, शरण तेरे मैं आया हूँ। लगावो पार भव से तो, प्रभु बेड़े हमारे को ॥5॥

✍️ रचयिता: रूडमल

इस भजन के बारे में

यह भजन वीर बर्बरीक (खाटू श्याम जी) की महिमा को समर्पित है, जो भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र थे। भजन का भावार्थ यह है कि सर्वप्रथम गौरी नंदन गणेश जी का स्मरण कर, हमें अपने आराध्य श्याम प्रभु की भक्ति करनी चाहिए। बर्बरीक ने सत्य और धर्म की रक्षा के लिए अपना शीश दान कर दिया था, जिससे वे 'शीश के दानी' कहलाए। भगवान श्री कृष्ण ने उनकी इस महान बलि से प्रसन्न होकर उन्हें कलयुग में अपने नाम से पूजे जाने का वरदान दिया था।

भक्त इस भजन को विशेष रूप से खाटू श्याम जी के दरबार में या घर पर कीर्तन के दौरान गाते हैं। इसे गाने का मुख्य उद्देश्य प्रभु के प्रति कृतज्ञता प्रकट करना और अपने जीवन की बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करना है। जब भक्त स्वयं को असहाय महसूस करते हैं, तब वे इस भजन के माध्यम से बाबा श्याम से भवसागर से पार लगाने की विनती करते हैं। यह भजन मन में अटूट विश्वास और समर्पण का भाव जगाता है, जिससे भक्त को कठिन समय में भी धैर्य और साहस मिलता है।

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