Jai Ganesh Deva (Aarti)
जय गणेश देवा (गणेश आरती)
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इस भजन के बारे में
यह प्रसिद्ध आरती भगवान गणेश को समर्पित है, जिन्हें 'विघ्नहर्ता' माना जाता है। इस भजन में गणेश जी के स्वरूप का वर्णन है—वे एकदंत हैं, चार भुजाओं वाले हैं और मूषक की सवारी करते हैं। भक्त माता पार्वती और पिता महादेव के लाडले पुत्र गणेश जी की स्तुति करते हुए उनसे प्रार्थना करते हैं कि वे हमारे जीवन के सभी कष्टों को दूर करें। यह आरती हमें याद दिलाती है कि गणेश जी की कृपा से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं।
भक्त इस आरती को किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत में, गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर या प्रतिदिन पूजा के अंत में गाते हैं। इसे गाने से मन में शांति और सकारात्मकता का संचार होता है। भक्त श्रद्धापूर्वक उन्हें मोदक और फल का भोग लगाते हैं और उनसे सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। यह भजन हमें सिखाता है कि यदि हम सच्चे मन से गणेश जी की शरण में जाएं, तो वे हमारी सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं और हमें सही मार्ग दिखाते हैं।
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