Hanuman Ji

Jayati Markatadhish (Hanumat Stuti)

श्री हनुमत स्तुति — जयति मर्कटाधीश (विनय पत्रिका)

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Jayati Markatadhish (Hanumat Stuti)
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जयति मर्कटाधीश, मृगराज-विक्रम, महादेव, मुद-मंगलालय, कपाली। मोह-मद-क्रोध-कामादि-खल-संकुल, घोर संसार-निशि किरणमाली॥ १॥ जयति लसदंजनादितिज, कपि-केसरी-कश्यप-प्रभव, जगदार्तीहर्ता। लोक-लोकप-कोक-कोकनद-शोकहर, हंस हनुमान कल्याणकर्ता॥ २॥ जयति सुविशाल-विकराल-विग्रह, वज्रसार सर्वांग भुजदंड भारी। कुलिषनख, दशनवर लसत, बालधिबृहद, वैरी-शस्त्रास्तधर कुधरधारी॥ ३॥ जयति जानकी-शोच-संताप-मोचन, रामलक्ष्मणानंद-वारिज-विकासी। कीष-कौतुक-केलि-लूम-लंका-दहन, दालान कानन तरुण तेजरासी॥ ४॥ जयति पातोधि-पाषाण-जलयांकर, यातुधान-प्रचुर-हर्ष-हाता। दुष्ट रावण-कुम्भकर्ण-पाकारिजित-मर्मभित, कर्म-परिपाक-दाता॥ ५॥ जयति भुवनैकभूषण, विभीषणवरद, विहित कृत राम-संग्राम साका। पुष्पकारूड़ सौमित्री-सीता-सहित, भानु-कुलभानु-कीरति-पताका॥ ६॥ जयति पर-यन्त्रमंत्राभिचार-ग्रसन, कारमन-कूट-कृत्यादि-हंता। शाकिनी-डाकिनी-पूतना-प्रेत-वेताल-भूत-प्रमथ-यूथ-यंता॥ ७॥ जयति वेदान्तविद विविध-विद्या-विषद, वेड-वेदांगविद ब्रम्हवादी। ज्ञान-विज्ञानं-वैराग्य-भाजन विभो, विमल गुन गनती शुकनारदादि॥ ८॥ जयति काल-गुन-कर्म-माया-मथन, निश्छलज्ञान, वृत-सत्यरत, धर्मचारी। सिद्ध-सुरवृंद-योगीन्द्र-सेवित सदा दास तुलसी प्रनत भय-तमारी॥ ९॥

इस भजन के बारे में

यह स्तुति गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित 'विनय पत्रिका' का एक अत्यंत प्रभावशाली अंश है, जिसमें उन्होंने पवनपुत्र हनुमान जी के विराट और दिव्य स्वरूप का वर्णन किया है। इस भजन में हनुमान जी को 'मर्कटाधीश' यानी वानरों के स्वामी और महादेव के अंशावतार के रूप में संबोधित किया गया है। इसका भावार्थ यह है कि हनुमान जी संसार रूपी घोर अंधकार को मिटाने वाले सूर्य के समान हैं, जो भक्तों के मोह, क्रोध और काम जैसे विकारों को नष्ट कर देते हैं। वे न केवल माता जानकी के दुखों को हरने वाले हैं, बल्कि राम-लक्ष्मण के आनंद को बढ़ाने वाले और दुष्टों का संहार करने वाले महाबली हैं।

भक्त इस स्तुति का गायन विशेष रूप से संकटों से मुक्ति पाने और मन में असीम साहस भरने के लिए करते हैं। हनुमान जी का यह स्वरूप नकारात्मक शक्तियों, जैसे भूत-प्रेत, डाकिनी-शाकिनी और तंत्र-मंत्र के भय को दूर करने वाला माना गया है। जब भक्त स्वयं को असहाय महसूस करते हैं या जीवन में बाधाएं आती हैं, तब इस स्तुति का पाठ करने से मन में शांति और आत्मविश्वास का संचार होता है। यह भजन हमें याद दिलाता है कि जो हनुमान जी की शरण में है, उसे काल, कर्म और माया का भय नहीं सता सकता, क्योंकि वे स्वयं ज्ञान, वैराग्य और भक्ति के साक्षात भंडार हैं।

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