Hanuman Ji

Jayati Markatadhish (Hanumat Stuti)

श्री हनुमत स्तुति — जयति मर्कटाधीश (विनय पत्रिका)

👁 4 views
Jayati Markatadhish (Hanumat Stuti)
Text size:
जयति मर्कटाधीश, मृगराज-विक्रम, महादेव, मुद-मंगलालय, कपाली। मोह-मद-क्रोध-कामादि-खल-संकुल, घोर संसार-निशि किरणमाली॥ १॥ जयति लसदंजनादितिज, कपि-केसरी-कश्यप-प्रभव, जगदार्तीहर्ता। लोक-लोकप-कोक-कोकनद-शोकहर, हंस हनुमान कल्याणकर्ता॥ २॥ जयति सुविशाल-विकराल-विग्रह, वज्रसार सर्वांग भुजदंड भारी। कुलिषनख, दशनवर लसत, बालधिबृहद, वैरी-शस्त्रास्तधर कुधरधारी॥ ३॥ जयति जानकी-शोच-संताप-मोचन, रामलक्ष्मणानंद-वारिज-विकासी। कीष-कौतुक-केलि-लूम-लंका-दहन, दालान कानन तरुण तेजरासी॥ ४॥ जयति पातोधि-पाषाण-जलयांकर, यातुधान-प्रचुर-हर्ष-हाता। दुष्ट रावण-कुम्भकर्ण-पाकारिजित-मर्मभित, कर्म-परिपाक-दाता॥ ५॥ जयति भुवनैकभूषण, विभीषणवरद, विहित कृत राम-संग्राम साका। पुष्पकारूड़ सौमित्री-सीता-सहित, भानु-कुलभानु-कीरति-पताका॥ ६॥ जयति पर-यन्त्रमंत्राभिचार-ग्रसन, कारमन-कूट-कृत्यादि-हंता। शाकिनी-डाकिनी-पूतना-प्रेत-वेताल-भूत-प्रमथ-यूथ-यंता॥ ७॥ जयति वेदान्तविद विविध-विद्या-विषद, वेड-वेदांगविद ब्रम्हवादी। ज्ञान-विज्ञानं-वैराग्य-भाजन विभो, विमल गुन गनती शुकनारदादि॥ ८॥ जयति काल-गुन-कर्म-माया-मथन, निश्छलज्ञान, वृत-सत्यरत, धर्मचारी। सिद्ध-सुरवृंद-योगीन्द्र-सेवित सदा दास तुलसी प्रनत भय-तमारी॥ ९॥

Related Bhajans