Hanuman Ji

Salasar Ra Mandir Mein

सालासर रा मन्दिर में

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यहीं चलाएँ · Play here
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दोहरा: हनुमत तेरी धाक से, और धुजे लंका कोट। तुम पायक श्रीराम के, थारे पैहरण लाल लंगोट ॥ स्थाई: हनुमान, विराजे ओ सदा बजरंग विराजे ओ। झालर शंख नगारा बाजे रे, बाजे रे। सालासर रा मन्दिर में हनुमान विराजे रे ॥ भारत राजस्थान में जी, सालासर एक गाँव। सुरज साम्हौ बण्यो देवरो, बालाजी रो धाम। ज्यों पर लाल धजा फहरावे रे। सालासर रा मन्दिर में हनुमान विराजे रे ॥ नारैळों री गिणती कोनी, सुवर्ण छत्र अपार। दूर-दूर सूं आवे जातक, दर्शन ने नर नार। बाबो अटक्या कारज सारे ओ। सालासर रा मन्दिर में हनुमान विराजे रे ॥ चैत सूदी पूनम को मेलो, भीड़ लगे अति भारी। नर नारी तेरा दर्शन करवा, आवे बारी बारी। थारे जात झड़ुला चढ़ावे ओ। सालासर रा मन्दिर में हनुमान विराजे रे ॥ रामदूत अंजनी के लाल का, धरो हमेशा ध्यान। चैनसिंह चरणों रो चाकर, लाज राखे हनुमान। बाबो बेड़ा पार लगावे ओ। सालासर रा मन्दिर में हनुमान विराजे रे ॥

इस भजन के बारे में

यह भजन राजस्थान के प्रसिद्ध सालासर बालाजी धाम की महिमा का गुणगान करता है। इसमें भक्त हनुमान जी के उस स्वरूप की वंदना करते हैं जो सालासर में साक्षात विराजमान हैं। भजन का भाव यह है कि प्रभु श्रीराम के परम भक्त हनुमान जी अपनी शक्ति और कृपा से भक्तों के सभी कष्टों को हर लेते हैं। यहाँ के मंदिर में बजते शंख और नगाड़े एक दिव्य वातावरण का निर्माण करते हैं, जहाँ दूर-दूर से भक्त अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं और बाबा उनकी झोली खुशियों से भर देते हैं।

यह भजन मुख्य रूप से चैत्र पूर्णिमा के मेले और मंगलवार या शनिवार के विशेष दिनों में गाया जाता है। जब भक्त अपने जीवन में संकट महसूस करते हैं या किसी कार्य की सिद्धि चाहते हैं, तब वे इस भजन के माध्यम से हनुमान जी का स्मरण करते हैं। इसे गाने से मन में अटूट विश्वास और शांति का अनुभव होता है। यह भजन हमें याद दिलाता है कि सालासर बालाजी की शरण में जाने वाले हर भक्त का बेड़ा पार हो जाता है और हनुमान जी सदैव अपने भक्तों की लाज रखते हैं।

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