Hanuman Ji

He Dukh Bhanjan Maruti Nandan

हे दुःख भंजन मारुती नंदन

👁 3 views
Text size:
॥ श्लोक ॥ अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता। दुखियों के तुम भाग्यविधाता॥ हे दुःख भन्जन, मारुती नंदन, सुन लो मेरी पुकार। पवनसुत विनती बारम्बार॥ अष्ट सिद्धि, नव निधि के दाता, दुखिओं के तुम भाग्यविधाता। सियाराम के काज सवारे, मेरा करो उद्धार॥ पवनसुत विनती बारम्बार। हे दुःख भन्जन, मारुती नंदन, सुन लो मेरी पुकार। पवनसुत विनती बारम्बार॥ अपरम्पार है शक्ति तुम्हारी, तुम पर रीझे अवधबिहारी। भक्तिभाव से ध्याऊं तोहे, कर दुखों से पार॥ पवनसुत विनती बारम्बार। हे दुःख भन्जन, मारुती नंदन, सुन लो मेरी पुकार। पवनसुत विनती बारम्बार॥ जपूँ निरंतर नाम तिहरा, अब नहीं छोडूं तेरा द्वारा। रामभक्त मोहे शरण मे लीजे, भाव सागर से तार॥ पवनसुत विनती बारम्बार। हे दुःख भन्जन, मारुती नंदन, सुन लो मेरी पुकार। पवनसुत विनती बारम्बार॥

Related Bhajans