Hanuman Ji

He Dukh Bhanjan Maruti Nandan

हे दुःख भंजन मारुती नंदन

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॥ श्लोक ॥ अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता। दुखियों के तुम भाग्यविधाता॥ हे दुःख भन्जन, मारुती नंदन, सुन लो मेरी पुकार। पवनसुत विनती बारम्बार॥ अष्ट सिद्धि, नव निधि के दाता, दुखिओं के तुम भाग्यविधाता। सियाराम के काज सवारे, मेरा करो उद्धार॥ पवनसुत विनती बारम्बार। हे दुःख भन्जन, मारुती नंदन, सुन लो मेरी पुकार। पवनसुत विनती बारम्बार॥ अपरम्पार है शक्ति तुम्हारी, तुम पर रीझे अवधबिहारी। भक्तिभाव से ध्याऊं तोहे, कर दुखों से पार॥ पवनसुत विनती बारम्बार। हे दुःख भन्जन, मारुती नंदन, सुन लो मेरी पुकार। पवनसुत विनती बारम्बार॥ जपूँ निरंतर नाम तिहरा, अब नहीं छोडूं तेरा द्वारा। रामभक्त मोहे शरण मे लीजे, भाव सागर से तार॥ पवनसुत विनती बारम्बार। हे दुःख भन्जन, मारुती नंदन, सुन लो मेरी पुकार। पवनसुत विनती बारम्बार॥

इस भजन के बारे में

यह भजन संकटमोचन हनुमान जी को समर्पित है, जिन्हें 'दुःख भंजन' यानी दुखों को दूर करने वाला कहा गया है। इस भजन का भावार्थ यह है कि हनुमान जी अष्ट सिद्धि और नव निधि के दाता हैं और वे भक्तों के भाग्य को बदलने की शक्ति रखते हैं। भक्त उनसे प्रार्थना करता है कि जिस प्रकार उन्होंने प्रभु श्री राम के कार्य सिद्ध किए, उसी प्रकार वे भक्त के जीवन के कष्टों को दूर कर उसे भवसागर से पार लगाएं। यह भजन हनुमान जी की अपार शक्ति और उनकी राम भक्ति के प्रति अटूट श्रद्धा को दर्शाता है।

भक्त इस भजन को विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार के दिन गाते हैं। जब मन में कोई चिंता हो या जीवन में कठिन परिस्थितियाँ आएं, तब इस भजन का गायन मन को असीम शांति और संबल प्रदान करता है। इसे गाने से हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है और भक्त का आत्मविश्वास बढ़ता है। यह भजन हमें याद दिलाता है कि यदि हम पूरी निष्ठा से बजरंगबली की शरण में जाएं, तो वे हमारे सभी दुखों को हर लेते हैं और हमें सही मार्ग दिखाते हैं।

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