Hanuman Ji

Hanumat Stuti (Jayati Vaat-Sanjaat)

श्री हनुमत स्तुति — जयति वात-संजात (विनय पत्रिका)

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Hanumat Stuti (Jayati Vaat-Sanjaat)
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जयति वात-संजात, विख्यात विक्रम, बृहदबाहू, बलबिपुल, बालधिबिसाला। जातरूपाचलाकारविग्रह, लसल्लोम विद्युल्लता ज्वालमाला॥ १॥ जयति बालार्क वर-वदन, पिंगल-नयन, कपिश-कर्कश-जटाजूटधारी। विकट भृकुटी, वज्र दशन नख, वैरी-मदमत्त-कुंजर-पुंज-कुंजरारी॥ २॥ जयति भीमार्जुन-व्यालसूदन-गर्वहर, धनञ्जय-रथ-त्रान-केतु। भीष्म-द्रोण-कर्णादि-पालित, कालदृक सुयोधन-चामू-निधन-हेतु॥ ३॥ जयति गजराजदातार, हन्तार संसार-संकट, दनुज-दर्पहारी। इति-अति-भीति-गृह-प्रेत-चौरानल व्याधिबाधा-शमन घोर मारी॥ ४॥ जयति निगमागम व्याकरण करणालिपि, काव्यकौतुक-कला-कोटि-सिंधो। सामगायक, भक्त-कामदायक, वामदेव, श्रीराम-प्रिय-प्रेम बंधो॥ ५॥ जयति घर्मांशु-संदग्ध-संपाती-नवपक्ष-लोचन-दिव्य-देह्दाता। कालकलि-पापसंताप-संकुल सदा, प्रनत तुलसीदास तात-माता॥ ६॥

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