Hanumat Stuti (Jayati Mangalagaar)
श्री हनुमत स्तुति — जयति मंगलागार (विनय पत्रिका)
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इस भजन के बारे में
यह स्तुति गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित 'विनय पत्रिका' का एक अत्यंत दिव्य अंश है, जिसमें उन्होंने पवनपुत्र हनुमान जी की महिमा का गुणगान किया है। इस भजन में हनुमान जी को 'मंगलागार' यानी मंगल का भंडार कहा गया है। तुलसीदास जी बताते हैं कि हनुमान जी भगवान शिव के अंश हैं और वे प्रभु श्री राम के परम भक्त हैं। वे संसार के दुखों को हरने वाले और राक्षसों का संहार करने वाले हैं। इस स्तुति का भाव यह है कि हनुमान जी अपने भक्तों के कष्टों को उसी प्रकार मिटा देते हैं जैसे सूर्य अंधकार को नष्ट कर देता है।
भक्त इस स्तुति को विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार के दिन गाते हैं। इसे गाने का मुख्य उद्देश्य मन की शांति, साहस और प्रभु श्री राम की भक्ति प्राप्त करना है। जब भक्त जीवन में किसी कठिन परिस्थिति या भय का अनुभव करते हैं, तब इस स्तुति का पाठ उन्हें मानसिक बल और सुरक्षा का अनुभव कराता है। यह भजन हनुमान जी के उस स्वरूप को दर्शाता है जो सदैव राम-काज में लीन रहते हैं और अपने भक्तों को शीतलता प्रदान करते हैं। इसे श्रद्धापूर्वक गाने से हनुमान जी की कृपा और आशीर्वाद सहज ही प्राप्त होता है।
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