Hanuman Ji

Hanumat Stuti (Jayati Mangalagaar)

श्री हनुमत स्तुति — जयति मंगलागार (विनय पत्रिका)

👁 2 views
Hanumat Stuti (Jayati Mangalagaar)
Text size:
जयति मंगलागार, संसार भारापहर, वानराकारविग्रह पुरारी। राम-रोषानल-ज्वाल्माला-मिष ध्वांतचर-सलभ-संहारकारी॥ १॥ जयति मरुदंजनामोद-मंदिर, नतग्रीव सुग्रीव-दु:खैकबंधो। यातुधानोधत-क्रुद्ध-कालाग्निहर, सिद्ध-सुर-सज्जनानंद-सिंधो॥ २॥ जयति रुद्राग्रणी, विश्व-वंद्याग्रणी, विश्वविख्यात-भट-चक्रवर्ती। सामगाताग्रणी, कामजेताग्रणी, रामहित, रामभक्तानुवर्ती॥ ३॥ जयति संग्रामजय, रामसंदेहसर, कौशला-कुशल-कल्याणभाषी। राम-विरहार्क-संतप्त-भरतादि-नरनारी-शीतलकरन कल्पशाषी॥ ४॥ जयति सिंघसनासीन सीतारमण, निरखि, निर्भरहरष नृत्यकारी। राम संभ्राज शोभा-सहित सर्वदा तुलसीमानस-रामपुर-विहारी॥ ५॥

Related Bhajans