श्री हनुमान वडवानल स्तोत्र भगवान हनुमान के अत्यंत शक्तिशाली और उग्र स्वरूप को समर्पित है। 'वडवानल' का अर्थ है समुद्र की अग्नि, जो सब कुछ भस्म करने में समर्थ है। इस स्तोत्र का भाव यह है कि जिस प्रकार समुद्र की अग्नि जल को भी सुखा देती है, उसी प्रकार हनुमान जी अपने भक्तों के जीवन के सभी कष्टों, रोगों, नकारात्मक शक्तियों, बुरी नजर और शत्रुओं के भय को पूरी तरह नष्ट कर देते हैं। यह स्तोत्र विभीषण द्वारा रचित माना जाता है, जिसमें हनुमान जी के पराक्रम और उनकी रक्षा करने वाली शक्ति का गुणगान किया गया है।
भक्त इस स्तोत्र का पाठ विशेष रूप से तब करते हैं जब वे जीवन में अत्यधिक संकट, मानसिक अशांति, या किसी अज्ञात भय का सामना कर रहे हों। इसे अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है, इसलिए इसका पाठ पूरी श्रद्धा और पवित्रता के साथ किया जाना चाहिए। नियमित रूप से इसका पाठ करने से साधक को साहस, आत्मविश्वास और सुरक्षा का अनुभव होता है। यह स्तोत्र न केवल नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर करता है, बल्कि भक्त के मन में प्रभु श्री राम के प्रति अटूट भक्ति और हनुमान जी के प्रति पूर्ण समर्पण का भाव भी जागृत करता है।