Hanuman Ji

Maruti Stotra (Bhimrupi Maharudra)

श्री मारुति स्तोत्र — भीमरूपी महारुद्रा

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भीमरूपी महारुद्रा, वज्र हनुमान मारुती। वनारी अंजनीसूता, रामदूता प्रभंजना॥ १॥ महाबळी प्राणदाता, सकळां उठवीं बळें। सौख्यकारी शोकहर्ता, धूर्त वैष्णव गायका॥ २॥ दिनानाथा हरीरूपा, सुंदरा जगदंतरा। पाताळ देवता हंता, भव्य सिंदूर लेपना॥ ३॥ लोकनाथा जगन्नाथा, प्राणनाथा पुरातना। पुण्यवंता पुण्यशीला, पावना परतोषका॥ ४॥ कोटिच्या कोटि उड्डाणें, झेपावे उत्तरेकडे। मंद्राद्रीसारिखा द्रोणू, क्रोधे उत्पाटिला बळें॥ ९॥ रामदासी अग्रगण्यू, कपिकुळासी मंडण। रामरूपी अंतरात्मा, दर्शनें दोष नासती॥ १७॥ ॥ इति श्रीरामदासकृतं संकटनिरसनं मारुतिस्तोत्रं संपूर्णम् ॥ (टिप: यह भीमरूपी महारुद्र मारुति स्तोत्र का मुख्य/चुनिंदा अंश है।)

इस भजन के बारे में

भीमरूपी महारुद्र स्तोत्र समर्थ रामदास स्वामी द्वारा रचित एक अत्यंत शक्तिशाली स्तोत्र है, जो भगवान हनुमान के उग्र और पराक्रमी स्वरूप का वर्णन करता है। इस स्तोत्र में हनुमान जी को 'वज्र' के समान कठोर, 'प्राणदाता' और 'शोकहर्ता' के रूप में संबोधित किया गया है। इसका भावार्थ यह है कि हनुमान जी न केवल शारीरिक बल के प्रतीक हैं, बल्कि वे भक्तों के सभी दुखों और संकटों को दूर करने वाले परम रक्षक भी हैं। वे प्रभु श्री राम के अनन्य भक्त हैं और उनके स्मरण मात्र से ही मन के समस्त दोष और भय नष्ट हो जाते हैं।

भक्त इस स्तोत्र का पाठ विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार के दिन करते हैं। इसे संकटमोचन स्तोत्र के रूप में भी जाना जाता है, इसलिए जब भी जीवन में कोई बाधा आए या मन में नकारात्मकता हो, तब इसका पाठ करना बहुत लाभकारी माना जाता है। इसे पढ़ने से साधक के भीतर आत्मविश्वास, साहस और मानसिक शांति का संचार होता है। यह स्तोत्र हमें यह सिखाता है कि हनुमान जी की शरण में जाने से भक्त को बल, बुद्धि और भक्ति तीनों की प्राप्ति होती है, जिससे वह जीवन की हर कठिन परिस्थिति का सामना करने में सक्षम हो जाता है।

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