Choto So Vanar
छोटो सो वानर
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✍️ रचयिता: राजू पंजाबी
इस भजन के बारे में
यह भजन संकटमोचन हनुमान जी की बाल-सुलभ लीलाओं और उनकी भक्त-वत्सलता को समर्पित है। इसमें एक बहुत ही प्यारे और चंचल भाव का वर्णन है, जहाँ भक्त कल्पना करता है कि हनुमान जी रात के अंधेरे में चुपके से आकर सवामणी के स्वादिष्ट लड्डू खा गए। यह भजन प्रभु और भक्त के बीच के उस मधुर और अनौपचारिक रिश्ते को दर्शाता है, जहाँ भक्त अपने आराध्य को अपना सखा मानकर उनसे लाड़-प्यार भरी शिकायतें करता है।
हनुमान जी को समर्पित यह रचना विशेष रूप से मंगलवार, शनिवार या हनुमान जयंती के अवसर पर गाई जाती है। जब भक्त का मन आनंद से भरा हो या वह हनुमान जी के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा व्यक्त करना चाहता हो, तब इस भजन को गाने से मन में एक अद्भुत प्रसन्नता और भक्ति का संचार होता है। यह भजन हमें सिखाता है कि भगवान केवल विधि-विधान के भूखे नहीं हैं, बल्कि वे अपने भक्त के प्रेम और भाव के भूखे हैं। इसे गाकर भक्त अपने मन के सारे संकोच मिटाकर हनुमान जी के साथ एक आत्मीय संबंध का अनुभव करते हैं।
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