Hanuman Ji

Manojavam Marut Tulya Vegam

श्री हनुमंत स्तुति (मनोजवं मारुत तुल्यवेगं)

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मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥ बुद्धिर्बलं यशोधैर्यं निर्भयत्वमरोगता। अजाड्यं वाक्पटुत्वं च हनुमत्स्मरणाद्भवेत्॥

इस भजन के बारे में

यह स्तुति भगवान श्री हनुमान जी के अद्भुत स्वरूप और उनके गुणों का वर्णन करती है। इस श्लोक में बताया गया है कि हनुमान जी मन की गति से चलने वाले, वायु के समान वेगवान और अपनी इंद्रियों को वश में रखने वाले हैं। वे बुद्धिमानों में श्रेष्ठ, श्रीराम के परम भक्त और वानर सेना के नायक हैं। इस स्तुति के माध्यम से भक्त हनुमान जी की शरण में जाकर उनसे बल, बुद्धि और सुरक्षा की प्रार्थना करता है। यह स्तुति हमें सिखाती है कि हनुमान जी का स्मरण करने से जीवन में साहस, यश, आरोग्य और वाणी में निपुणता प्राप्त होती है।

भक्त इस स्तुति को विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान जी के मंदिर में या घर पर पूजा के समय गाते हैं। जब भी मन में भय हो, आत्मविश्वास की कमी महसूस हो या किसी कठिन कार्य की शुरुआत करनी हो, तब इस स्तुति का पाठ करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है। इसे गाने से मन शांत होता है और हनुमान जी की कृपा से भक्त को हर प्रकार के संकट से मुक्ति मिलती है। यह स्तुति हनुमान जी के प्रति समर्पण और उनकी शक्ति के प्रति अटूट विश्वास को दर्शाती है।

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