Durga Mata

Mangal Ki Seva (Kali Mata Aarti)

मंगल की सेवा (काली माता आरती)

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मंगल की सेवा सुन मेरी देवा, हाथ जोड़ तेरे द्वार खड़े। पान सुपारी ध्वजा नारियल, ले ज्वाला तेरी भेंट धरे॥ सुन जगदम्बे न कर विलम्बे, सन्तन के भण्डार भरे। सन्तन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जय काली कल्याण करे॥ बुद्धि विधाता तू जग-माता, मेरा कारज सिद्ध करे। चरण कमल का लिया आसरा, शरण तुम्हारी आन पड़े॥ जब जब भीड़ पड़ी भक्तन पर, तब तब आप सहाय करे। सन्तन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जय काली कल्याण करे॥ कुपित होकर दानव मारे, चण्ड मुण्ड सब चूर करे। जब तुम देखो दया रूप हो, पल में संकट दूर करे॥ सौम्य स्वभाव धर्यो मेरी माता, जन की अर्ज़ कबूल करे। सन्तन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जय काली कल्याण करे॥

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