Durga Mata

Hirda Mein Revo Bhavani

हिरदा में रेवो भवानी परदा में रेवो

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हिरदा में रेवो भवानी परदा में रेवो। थारी जग माँहि जोत सवाई म्हारी माँ। हिरदा में रेवो भवानी परदा में रेवो, हिरदा में रेवो भवानी परदा में रेवो, म्हारी डावोड़ी भुजा पर दर्शन देवो जोगमाया, हिरदा में रेवो भवानी परदा में रेवो ॥ टेक ॥ अजारण-बजारण माताजी दर्जी जी बिठाऊँला। हुकम करो तो चुनड़ी चांदूं जोगमाया। हिरदा में रेवो भवानी परदा में रेवो ॥1॥ अजारण-बजारण माताजी माली जी बिठाऊँला। हुकम करो तो फुलडा चांदूं जोगमाया। हिरदा में रेवो भवानी परदा में रेवो ॥2॥ अजारण-बजारण माताजी सोनी जी बिठाऊँला। हुकम करो तो छतर चांदूं जोगमाया। हिरदा में रेवो भवानी परदा में रेवो ॥3॥ अजारण-बजारण माताजी कन्दोई बिठाऊँला। हुकम करो तो लाडू चांदूं जोगमाया। हिरदा में रेवो भवानी परदा में रेवो ॥4॥ भगात मण्डल मैया हिलमिल गावै। शरणे आयां री लजिया राखो जोगमाया। हिरदा में रेवो भवानी परदा में रेवो ॥5॥

इस भजन के बारे में

यह सुंदर भजन माँ भवानी (जोगमाया) को समर्पित है, जिसमें भक्त अपनी आराध्या से प्रार्थना करता है कि वे सदैव उसके हृदय में निवास करें। इस भजन का भाव यह है कि माँ की ज्योति पूरे संसार में सबसे निराली और प्रकाशमान है। भक्त अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए कहता है कि यदि माँ आज्ञा दें, तो वह उनके लिए चुनरी, सुंदर फूल, छत्र और भोग के लिए लाडू जैसी भेंट अर्पित करना चाहता है। यह भजन माँ की ममता और भक्त की अनन्य निष्ठा का एक मधुर संगम है, जो यह दर्शाता है कि ईश्वर बाहरी आडंबरों से अधिक भक्त के प्रेमपूर्ण हृदय में बसना पसंद करते हैं।

भक्त इस भजन को विशेष रूप से नवरात्रि, माता के जागरण या किसी भी मांगलिक अवसर पर गाते हैं। इसे गाने का मुख्य उद्देश्य माँ से अपनी रक्षा और उनकी कृपा की कामना करना है। जब भक्त समूह में मिलकर 'हिरदा में रेवो भवानी' गाते हैं, तो वातावरण भक्तिमय और सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है। यह भजन मन को शांति प्रदान करता है और विश्वास दिलाता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से माँ की शरण में आता है, माँ उसकी लाज और मर्यादा की रक्षा अवश्य करती हैं।

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