Hanuman Ji

Balaji Ne Laad Ladave Mata

बालाजी ने लाड लड़ावे माता

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राम नगरिया राम को, बसे गंग की तीर। अटल राज महाराज को, चौकी हनुमत वीर ॥ दोहा ॥ बालाजी ने लाड लड़ावे माता अंजनी। लड़ावे माता अंजनी, लड़ावे माता अंजनी। पवन सुत ने लाड लड़ावे माता अंजनी ॥ टेक ॥ नहावे धोंवावे वांने बस पहरावे। केसर रो तिलक लगावे माता अंजनी। बालाजी ने लाड लड़ावे माता अंजनी ॥1॥ आओ हनुमन्ता खेलो परवन्ता। रामजी रो नाम सिखावे माता अंजनी। बालाजी ने लाड लड़ावे माता अंजनी ॥2॥ सवा मन रो रोट ने चिरत गाय रो। चूर ने चूसमो जीमावे माता अंजनी। बालाजी ने लाड लड़ावे माता अंजनी ॥3॥ हाथों में झांझरिया, पावों में पेंजनियां। मन्दिरिये में नाच नचावे माता अंजनी। बालाजी ने लाड लड़ावे माता अंजनी ॥4॥ माधव कहे प्रभु संकट मोचन। राम जी रो नाम सिखावे माता अंजनी। बालाजी ने लाड लड़ावे माता अंजनी ॥5॥

✍️ रचयिता: माधव

इस भजन के बारे में

यह सुंदर भजन भगवान हनुमान जी और उनकी माता अंजनी के बीच के वात्सल्य प्रेम को समर्पित है। इस भजन में माता अंजनी द्वारा अपने पुत्र हनुमान जी को लाड़-प्यार करने, उन्हें नहलाने-धुलाने, तिलक लगाने और उन्हें राम नाम का सुमिरन सिखाने का बहुत ही भावपूर्ण वर्णन किया गया है। यह रचना हमें याद दिलाती है कि बल और पराक्रम के प्रतीक हनुमान जी भी अपनी माँ के लिए सदैव एक छोटे बालक के समान हैं, जो उनकी ममता की छांव में पलते हैं।

भक्त इस भजन को विशेष रूप से हनुमान जयंती, मंगलवार के दिन या किसी भी मांगलिक अवसर पर गाते हैं। इसे गाने से मन में भक्ति और वात्सल्य का भाव जागृत होता है, जिससे भक्त का हृदय शांत और प्रसन्न हो जाता है। यह भजन संकटमोचन हनुमान जी की कृपा पाने और उनके प्रति अपना प्रेम व्यक्त करने का एक सरल माध्यम है। इसे सुनकर ऐसा प्रतीत होता है जैसे हम स्वयं माता अंजनी के आँगन में बैठकर हनुमान जी की बाल-लीलाओं का आनंद ले रहे हों।

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