Hanuman Ji

Anjani Ko Lalo Bajrang Ram Bhakt Matwalo

अंजनी को लालो बजरंग राम भक्त मतवालो

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लाग्यो लक्ष्मण जी के बाण, आज्ञा संकट माहि प्राण, जद संजीवनी बूटी ल्याओ जी माँ अंजनी को लालो। टेर अंजनी को लालो बजरंग राम भक्त मतवालो बूटी वेद बता दी मोटी, मिल्ली द्रोणागिरि की चोटी, बजरंग ने तुरत बुलायो रे बो छ पवन बेग जाबालो ॥1॥ माँ अंजनी को लालो बजरंग राम भक्त मतवालो होगया दुखी रामजी भारी, आज्ञा सुनले बजरंग म्हारी, अब बूटी तुरत लियाजो रे वीरो लक्ष्मण छ मरबालो ॥2॥ माँ अंजनी को लालो बजरंग राम भक्त मतवालो आज्ञा पवन पिता की पावे बजरंग द्रोणागिरि पर जावे बठे बूटी समझ न आवे जी सारो पर्वत करे उजालो ॥3॥ माँ अंजनी को लालो बजरंग राम भक्त मतवालो घालियों पर्वत नीचे हाथ, बालों ढलती माझल रात, पूरा पर्वत ने उठा ल्याओ जी जद संकट ने हर बालों ॥4॥ माँ अंजनी को लालो बजरंग राम भक्त मतवालो उड़तो बीरबली ने देख भरत जी बाण चलायो एक, एक पग सु लंगड़ो हो गयो जी जद राम भक्त मतवालो ॥5॥ माँ अंजनी को लालो बजरंग राम भक्त मतवालो बजरंग घोल पीला दी बूटी जद लक्ष्मण की मूर्छा टूटी सिया राम जद गले लगाओ जी कोई हेमराज गा बालों ॥6॥ माँ अंजनी को लालो बजरंग राम भक्त मतवालो

✍️ रचयिता: हेमराज सैनी हीरापुरा

इस भजन के बारे में

यह भजन संकटमोचन हनुमान जी की अपार भक्ति और उनके साहस को समर्पित है। इसका भावार्थ यह है कि जब लक्ष्मण जी मूर्छित हुए, तो हनुमान जी ने अपनी माता अंजनी के लाल बनकर प्रभु श्री राम के कार्य को अपना धर्म माना। द्रोणागिरि पर्वत से संजीवनी बूटी लाने के लिए उन्होंने पूरे पर्वत को ही उठा लिया, जो उनकी असीम शक्ति और प्रभु के प्रति उनके अटूट समर्पण को दर्शाता है। यह भजन हमें सिखाता है कि जब हम सच्चे मन से प्रभु की सेवा करते हैं, तो हनुमान जी स्वयं हमारे सभी संकटों को हर लेते हैं। भक्त इस भजन को विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान जी के समक्ष गाते हैं। इसे गाने से मन में साहस और आत्मविश्वास का संचार होता है। जब भी जीवन में कोई कठिन परिस्थिति आए या मन में घबराहट हो, तो इस भजन का गायन करने से हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त होता है और भक्त को मानसिक शांति मिलती है। यह भजन प्रभु राम के प्रति हनुमान जी की अनन्य निष्ठा और प्रेम का एक सुंदर चित्रण है, जो हर भक्त के हृदय में भक्ति का दीप जला देता है।

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