Jaise Suraj Ki Garmi Se (Anup Jalota)
जैसे सूरज की गर्मी से
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इस भजन के बारे में
यह भजन प्रभु श्री राम के प्रति अटूट श्रद्धा और शरणागति का एक सुंदर उदाहरण है। इसमें भक्त कहता है कि जिस प्रकार चिलचिलाती धूप में झुलसते हुए शरीर को वृक्ष की शीतल छाया मिल जाए, वैसा ही परम सुख उसे प्रभु की शरण में आकर मिला है। यह रचना हमें सिखाती है कि संसार के दुखों और भटकन से व्याकुल मन को केवल प्रभु के चरणों में ही सच्चा आश्रय और शांति प्राप्त होती है।
यह भजन विशेष रूप से उन भक्तों के लिए है जो जीवन की उलझनों से थककर प्रभु का सानिध्य पाना चाहते हैं। भक्त यहाँ स्वीकार करता है कि प्रभु के चरणों में ही उसे समस्त तीर्थों का पुण्य और जीवन का असली आनंद मिल गया है। इसे किसी भी समय, विशेषकर मन की शांति के लिए या प्रभु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए गाया जा सकता है। यह भजन मन को एकाग्र करने और प्रभु के प्रति पूर्ण समर्पण का भाव जगाने में अत्यंत सहायक है।
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