Ram

Jaise Suraj Ki Garmi Se (Anup Jalota)

जैसे सूरज की गर्मी से

👁 243 views
Text size:
जैसे सूरज की गर्मी से, जलते हुए तन को। मिल जाये तरुवर की छाया, ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला है। मैं जब से शरण तेरी आया, मेरे राम॥ भटका हुआ मेरा मन था कोई, मिल ही गया फिर ठिकाना। भूले हुए पंछी ने जैसे, पहचान लिया आशियाना। मैं जब से शरण तेरी आया, मेरे राम॥ तेरे ही चरणों में सारे तीरथ, मुझको दिखाई दिए हैं। जबसे लिपट के तेरे चरणों से, मैंने सभी सुख लिए हैं। मैं जब से शरण तेरी आया, मेरे राम॥

Related Bhajans