Chadariya Jhini Re Jhini (Anup Jalota)

चदरिया झीनी रे झीनी

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चदरिया झीनी रे झीनी, राम नाम रस भीनी॥ अष्ट कमल का चरखा बनाया, पाँच तत्व की पूनी। नौ दस मास बुनन को लागे, मूरख मैली कीनी॥ जब मोरी चादर बन घर आई, रंगरेज को दीनी। ऐसा रंग रँगा रँगरेज ने, लालो लाल कर दीनी॥ चादर ओढ़ शंका मत करियो, ये दो दिन तुमको दीनी। मूरख लोग भेद नहिं जाने, दिन दिन मैली कीनी॥ दास कबीर ने ऐसी ओढ़ी, ज्यों की त्यों धर दीनी॥